शिक्षकों के लिए बुरी खबर, जा सकती है नौकरी
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शिक्षा विभाग में पीटीए शिक्षकों को अनुबंध में लाने की प्रक्रिया के दौरान बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि कुछ गैप पीरियड शिक्षकों ने फर्जी सर्टिफिकेट का सहारा लिया है। दस्तावेजों की जांच के दौरान फर्जी सर्टिफिकेट लगाने की बात सामने आई है।
फर्जीवाडे़ की आशंका को देखते हुए विभाग ने सभी प्रिंसिपलों को नए आदेश जारी किए हैं। डिप्टी डायरेक्टर्स, प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे दस्तावेजों की जांच को गंभीरता से लें।
अब तक 6945 पीटीए शिक्षकों में से करीब 5 हजार शिक्षकों को अनुबंध पर लाया जा चुका है।
इन शिक्षकों ने किया फर्जीवाड़ा
करीब 1500 शिक्षक अभी भी शेष रह गए हैं। इनमें 700 से अधिक गैप पीरियड शिक्षक शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार इन्हीं गैप पीरियड शिक्षकों में से ही फर्जी सर्टिफिकेट के मामले सामने आए हैं।
सरकार ने पैरा शिक्षकों को 60 दिन और पीटीए को 42 दिन के गैप में रिलेक्सेशन दे दी थी। सेवाकाल में इससे अधिक दिनों के गैप वाले शिक्षकों को अनुबंध पर लेने और नहीं लेने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।
यदि किसी शिक्षक ने अनुबंध पर आने के लिए झूठे सर्टिफिकेट का सहारा लिया है तो जांच के तुरंत बाद उनका स्वत: ही अनुबंध केंसिल हो जाएगा।
क्या कहता है विभाग?
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अशोक शर्मा का कहना है कि इस संबंध में सभी प्रिंसिपलों को निर्देश जारी हुए हैं। फिलहाल इस तरह की शिकायत अभी तक नहीं आई है।
वहीं, उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक शशि भूषण सेखरी का कहना है कि प्रिंसिपलों को सर्टिफिकेट वैधता जांचने का जिम्मा दिया गया था। यदि किसी मामले में मेडिकल सर्टिफिकेट सहित अन्य दस्तावेज भी फर्जी पाए जाते हैं तो संबंधित प्रिंसिपलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और शिक्षक का अनुबंध बिना नोटिस केंसिल हो जाएगा।