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Shimla News: निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ शिमला में गरजा छात्र-अभिभावक मंच

Wed, 15 Feb 2023 07:51 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 15 Feb 2023 07:51 PM IST
सार

वर्दी, किताबों, जूते, जुराबों के साथ छात्र के लिए हर चीज के लिए निजी स्कूल प्रबंधन की ओर से चिन्हित की गई दुकानों पर जाकर मनमाने दाम पर अभिभावक लूटने को मजबूर है। 

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chatra abhibhavak manch protest in Shimla against the arbitrariness of private schools
शिमला में गरजा छात्र-अभिभावक मंच - फोटो : संवाद

विस्तार

नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर फिर से निजी स्कूलों की मनमानी शुरू हो गई है। वर्दी, किताबों, जूते, जुराबों के साथ छात्र के लिए हर चीज के लिए निजी स्कूल प्रबंधन की ओर से चिन्हित की गई दुकानों पर जाकर मनमाने दाम पर अभिभावक लूटने को मजबूर है। छात्र-अभिभावक मंच ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंच ने प्रदेश सरकार से इसी बजट सत्र में निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए कड़ा कानून पास किए जाने की मांग को लेकर बुधवार को निदेशालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। मंच के पदाधिकारियों ने संयोजक विजेंद्र मेहरा की अगुवाई में परिसर में जमकर प्रदर्शन किया और शिक्षा निदेशक को मांग पत्र भी सौंपा। उच्च शिक्षा निदेशक डाॅ. अमरजीत कुमार शर्मा ने मंच के पदाधिकारियों की बात को सुना और आश्वासन दिश कि हर निजी स्कूल में आम सभाएं और पीटीए के गठन अनिवार्य किया जाएगा, फीस पर आम सभाओं में अभिभावकों की सहमति से ही निर्णय लिया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।

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फीस बढ़ोतरी, किताबों और वर्दी की कीमतों में बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए तुरंत आदेश जारी किए जाएंगे। निजी स्कूलों पर नकेल लगाने के लिए कानून और रेगुलेटरी कमीशन बनाने का प्रस्ताव जल्द सरकार को सौंपा जाएगा। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि वर्ष 2023 में ड्रेस और किताबों की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। अभिभावकों से निजी स्कूल प्रबंधन सीधी लूट कर रहे हैं, सरकार और शिक्षा विभाग इस पर मौन है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से निजी स्कूलों पर नकेल लगाने को कानून बनाकर लागू करने की मांग की। विजेंद्र का आरोप है कि निजी स्कूलों ने बड़ी चालाकी से वर्ष 2022 में गुमराह कर 80 फीसदी फीस ट्यूशन फीस के रूप में वसूली। दो वर्षों में 15 से 50 फीसदी तक फीस बढ़ाकर वसूली गई है। 99 प्रतिशत स्कूलों में पीटीए का गठन नहीं हुआ
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