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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chatra Abhibhavak Manch gherao Education Directorate in Shimla

पांच नवंबर को शिक्षा निदेशालय का घेराव करेगा छात्र अभिभावक मंच

Mon, 02 Nov 2020 04:31 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 02 Nov 2020 04:31 PM IST
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Chatra Abhibhavak Manch gherao Education Directorate in Shimla
छात्र अभिभावक मंच (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

निजी स्कूलों को पूरी फीस वसूली की मंजूरी देने के विरोध में पांच नवंबर को छात्र अभिभावक मंच ने उच्च शिक्षा निदेशालय का घेराव करने का एलान किया है। मंच ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस निर्णय को तुरंत वापिस लिया जाए व निजी स्कूलों द्वारा छात्रों व अभिभावकों की पूर्ण फीस वसूली में की जा रही मानसिक प्रताड़ना पर रोक लगाई जाए। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसलों को प्रदेश सरकार अपनी सुविधानुसार लागू करती है।

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मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा, सह संयोजक बिंदु जोशी, सदस्य विवेक कश्यप, फालमा चौहान, जय चन्द, राकेश रॉकी, राजेन्द्र कुमार व शैलेंद्र कुमार ने निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ा रहे अभिभावकों से पूर्ण फीस उगाही का बहिष्कार करने की अपील की है। उन्होंने पूर्ण फीस वसूली पर कैबिनेट के निर्णय को बेहद चौंकाने वाला छात्र व अभिभावक विरोधी निर्णय बताया है।
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विजेंद्र मेहरा ने बताया कि इस निर्णय के बाद निजी स्कूलों ने छात्रों व अभिभावकों को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया है। निजी स्कूलों व संस्थानों ने दोबारा से छात्रों व अभिभावकों को पूर्ण फीस जमा करने के लिए मोबाइल पर मैसेज भेजना शुरू कर दिए हैं। इन मैसेज में उन्हें डराया धमकाया जा रहा है कि अगर पूर्ण फीस जमा नहीं की गई तो छात्रों को न केवल संस्थानों से बाहर कर दिया जाएगा अपितु उन्हें परीक्षाओं में भी नहीं बैठने दिया जाएगा।
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मेहरा ने कहा कि सरकार और निजी स्कूलों की इस मिलीभगत के कारण ही सरकार ने मई में जान बूझकर अधिसूचना में अस्पष्टता दिखाई ताकि वक्त आने पर निजी स्कूलों को इसकी आड़ में लूट की खुली इजाजत दी जा  सके। टयूशन फीस के अलावा बाकी अन्य चार्जेज सहित फीस माफी को अधिसूचना में जानबूझ कर नहीं दर्शाया गया।

उन्होंने हैरानी जताई कि प्रदेश सरकार की कैबिनेट उच्च न्यायालय के एक निर्णय को आधार बनाकर निजी स्कूलों को खुली लूट की इजाजत दे रही है जबकि इसी सरकार ने 27 अप्रैल 2016 को उच्च न्यायालय द्वारा निजी स्कूलों द्वारा वसूली जाने वाली टयूशन फीस के अलावा  एडमिशन फीस, बिल्डिंग फंड, एनुअल चार्जेज व अन्य विविध फंडों पर लगाई गई रोक के निर्णय को लागू करने में पिछले चार वर्षों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।


इससे स्पष्ट है कि जब न्यायालय का निर्णय निजी स्कूल व संस्थान प्रबंधनों के पक्ष में आता है तो सरकार निर्णय को रातोंरात लागू कर देती है जबकि निर्णय इन निजी स्कूल व संस्थान प्रबंधनों के खिलाफ आता है तो सरकार चार वर्षों तक उस निर्णय को लागू नहीं करती है।

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