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केंद्र ने दी मंजूरी, अब ये शहर बनेंगे जन्नत

Thu, 19 Feb 2015 05:49 PM IST
Updated Thu, 19 Feb 2015 05:49 PM IST
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centre nod for smart city project in dharamsala and mandi sundernagar.

मंडी जिले के सुंदरनगर और कांगड़ा जिले के धर्मशाला को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। धर्मशाला स्मार्ट सिटी से पालमपुर, कांगड़ा, ज्वालाजी, नगरोटा बगवां और देहरा शहरों को भी जोड़ा जाएगा। सुंदरनगर से मंडी, नेरचौक, कुल्लू रिवालसर और मनाली को जोड़ा जाएगा।

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एक महीने के भीतर इनका प्लान तैयार होगा। इसके बाद स्मार्ट सिटी की डीपीआर तैयार होगी। जिस कंपनी को स्मार्ट सिटी के मॉडल तैयार करने का काम सौंपा है, वह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी प्राइस वाटरहाउस कुपर (पीडब्ल्यूसी) कंपनी है। इस कंपनी ने विश्व के सौ से अधिक देशों में काम किया है।

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पीपीपी मोड पर होगा स्मार्ट सिटी का काम

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प्रदेश में बनने वाली दो स्मार्ट सिटी का कार्य पीपीपी मोड पर होगा। कंपनी ने तीन महीने के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करने की बात कही है। इसके बाद इसे जमीनी स्तर पर उतारा जाना है। स्मार्ट सिटी की बिडिंग का काम भी इसी कंपनी को सौंपा गया है। करीब तीन साल के भीतर स्मार्ट सिटी का काम पूरा होगा।

ये होंगे स्मार्ट सिटी के फायदे- 24 घंटे मिलेगी पानी की सप्लाई। हर घर जुड़ेगा सीवरेज सुविधा से। सड़कें चौड़ी होंगी, वन वे होगा ट्रैफिक। हर चौराहे पर बनेगी पार्किंग। 10 मीटर की दूरी पर लगेंगी स्ट्रीट लाइटें।

शहरों में अंडरग्राउंड होंगे डंपर। सार्वजनिक स्थानों में हर 20 मीटर के बाद टॉयलेट। शॉपिंग माल और कम्यूनिटी सेंटर बनेंगे। शहरों के लिए स्पेशल बसें चलेंगी। शहरों के बीच से नहीं जाएंगी लांग रूट बसें। नंबर से होगी घर की पहचान।

चुनौतियां भी कम नहीं होंगी

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बेतरतीब बने हैं भवन, कैसे बिछेगी सीवरेज-पानी की पाइपें। शहरों में पांच मीटर से ज्यादा चौड़ी नहीं सड़कें, दोनों किनारों पर भवन। भवनों को हटाना सरकार के लिए चुनौती, कई लोग हो सकते हैं बेघर। जमीनों का अधिग्रहण करने पर भड़क सकती है जनता। शहरों से सटी पंचायतों से एनओसी लेने में आएगी दिक्कत। भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पहाड़ी और मैदानी इलाके में अंतर। सुविधाएं देने के बाद जनता पर पड़ेगी टैक्स की मार।

मंडी को संवारना मुश्किल- मंडी शहर में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। बाजार व इसके आसपास पार्किंग निर्माण के लिए जगह नहीं है। यहां इंदिरा मार्केट में एक निजी पार्किंग है। यहां 15 से 20 गाड़ियां ही पार्क हो सकती हैं। बाजार तंग है। सड़क इसलिए चौड़ी नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों किनारों पर भवनों का निर्माण हुआ है। मोती बाजार में कूड़ा एकत्र करने वाली बड़ी गाड़ी तक क्रॉस नहीं हो सकती। लोग हर कहीं गाड़ी पार्क कर देते हैं जिससे जाम लगा रहता है।  

वाहन ज्यादा और पार्किंग कम- धर्मशाला शहर स्मार्ट सिटी के लिए चुना है लेकिन यहां भी मंडी शहर की तर्ज पर सबसे बड़ी समस्या पार्किंग है। वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन इन्हें खड़े करने के लिए जगह नहीं है। धर्मशाला में एक सरकारी पार्किंग है जबकि एक पार्किंग का निर्माण अधर में लटका है। लोग जहां-तहां जगह देखकर अपने वाहन खड़े कर देते हैं। इससे लगातार जाम लगा रहता है।

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यूडी निदेशक जेएम पठानिया से बातचीत

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प्रश्न: धर्मशाला और सुंदरनगर स्मार्ट सिटी बन रहे हैं, कब काम शुरू होगा?
उत्तर: प्रदेश सरकार स्मार्ट सिटी को लेकर गंभीर है। औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं। कंपनी दो तीन दिन के भीतर मॉडल तैयार करने का काम शुरू कर देगी।
प्रश्न: कागजी कार्रवाई ठीक है, लेकिन जमीनी स्तर पर कैसे काम होगा?
उत्तर: कोई भी काम करने से पहले कागजी औपचारिकताएं करनी पड़ती हैं। कंपनी को काम सौंपा है। उन्हें स्थिति से अवगत कराया गया है। कंपनी विश्व की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। ये अपने स्तर पर काम करेगी।
प्रश्न: स्मार्ट सिटी बनने से जनता पर टैक्स लगेगा?
उत्तर: स्मार्ट सिटी पीपीपी मोड पर बनेगी। लोगों को सुविधा देने पर टैक्स तो देना पड़ेगा। कंपनी अपने स्तर पर टैक्स नहीं लगा सकती। जनता से कितना टैक्स लेना है, यह सरकार पर निर्भर रहता है।
प्रश्न: स्मार्ट सिटी से लोगों को क्या फायदा होगा?
उत्तर: हर तरह की सुविधा मुहैया होगी। 24 घंटे पानी, स्ट्रीट लाइटें, पार्किंग, सीवरेज, कम्यूनिटी सेंटर की सुविधा लोगों को मिलेगी।

पंचायतों को मिलेगा फायदा

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योजना के मुताबिक शहरों के आसपास आधा से एक किलोमीटर दूरी पर पंचायतें भी इस योजना से लाभान्वित होंगी। विभाग की मानें तो चयनित शहरों का आकार छोटा है। ऐसे में पंचायतों को भी शहरों में समायोजित किया जाना है।

युवाओं को रोजगार के अवसर- स्मार्ट सिटी बनने से युवाओं को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। स्मार्ट सिटी में लोगों को सुविधा मुहैया कराने के लिए कंपनी को ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। सरकार का प्रयास रहेगा कि हिमाचल के युवाओं को पहले रोजगार मिले।

स्मार्ट सिटी को लेकर दिल्ली में तीन बैठकें- शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल में बनने वाले दो स्मार्ट सिटी को लेकर दिल्ली में बैठकें हुई हैं। दोनों सिटी का मॉडल तैयार करने का जिम्मा विश्व की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी को सौंपा गया है। सुंदरनगर और धर्मशाला स्मार्ट सिटी के साथ 6-6 शहरों को जोड़ा जाएगा। शहरवासियों को हर तरह की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

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