केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों का नया ‘वोट बैंक’ बनाने की तैयारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव नजदीक आते देख राजनीतिक पार्टियों ने अपने वोट बैंक पर फोकस करना शुरू कर दिया है। जाति- धर्म और क्षेत्र के बजाय भाजपा की केंद्र सरकार एक नया वोट बैंक तैयार कर रही है। पिछले चार साल में केंद्रीय योजनाओं का लाभ पाने वाले लाभार्थियों का डाटा तैयार किया जा रहा है।
हिमाचल समेत भाजपा शासित सभी राज्यों की सरकारों को केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों का प्रदेश वार डाटा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मोदी सरकार इन लाभार्थियों से संपर्क कर अपनी उपलब्धियों को भुनाने के प्रयास में है। हालांकि इस कवायद को फीडबैक का नाम दिया जा रहा है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों का डाटा तैयार न होने पर अफसरों को कड़ी फटकार लगाई थी। अधिकारियों को अब 20 अक्तूबर तक डाटा तैयार करने का अल्टीमेटम दिया गया। मुख्य सचिव खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं।
उधर, भाजपा के सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि योजनाओं का लाभ पाने वाले लोगों में पार्टी व मोदी सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। ऐसे में उन्हें साथ रखना जरूरी है। अगर यह वोट बैंक उन्हें हासिल होता है तो इसके जरिए दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों जैसे विभिन्न वर्गों के लोगों को भी साथ लिया जा सकेगा।
हिमाचल में एक दर्जन से ज्यादा केंद्रीय योजनाएं लागू
केंद्र की ओर से आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, विभिन्न पेंशन योजनाएं, स्टार्ट अप इंडिया, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, उज्ज्वला, गृहिणी सुविधा, स्वास्थ्य संरक्षण जैसी एक दर्जन से ज्यादा योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ मिल रहा है।
केंद्रीय योजनाओं के हिमाचल में ही 21.18 लाख से अधिक लाभार्थी हैं। हमारा प्रयास है कि केंद्र सरकार की इन योजनाओं के हर लाभार्थी से सीधे तौर पर संवाद स्थापित किया जाए और उनसे फीडबैक लिया जाए। - जयराम ठाकुर, मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश