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Bilaspur News: इस महीने 1500 ट्रक ऑपरेटर नहीं दे पाएंगे बैंकों की किस्त

Sun, 22 Jan 2023 11:42 AM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 22 Jan 2023 11:42 AM IST
सार

प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक की बरमाणा शाखा में ऑपरेटरों का सबसे अधिक कर्ज करीब 35 करोड़ है। अन्य बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से भी कर्ज लिया गया है। 

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cement crisis in himachal: 1500 truck operators can not pay bank EMI this month
ट्रक (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद

विस्तार

एसीसी सीमेंट प्लांट बंद होने से इस माह बिलासुपर जिला ट्रक परिवहन सभा बरमाणा के करीब 1500 ट्रक ऑपरेटर बैंक की किस्त नहीं दे पाएंगे। 38 दिन से सीमेंट प्लांट बंद है। ऑपरेटर हर दिन अपने हक के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार इनकी समस्या का समाधान नहीं कर पाई है। इस कारण इस माह सभा के 90 फीसदी ऑपरेटर ट्रकों के कर्ज की किस्त नहीं चुका पाएंगे।

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ट्रक ऑपरेटरों पर निजी, सरकारी बैंक और फाइनेंस कंपनियों का करीब 150 करोड़ का कर्ज है। एक साल पहले सभा के 350 ऑपरेटरों ने मल्टीएक्सल ट्रक एसीसी की मांग पर खरीदे थे। इनकी कीमत बिना गत्ते के 30 लाख और गत्ते के साथ करीब 50 लाख है। अगर अदाणी समूह बरमाणा एसीसी सीमेंट प्लांट को शुरू नहीं करता है तो ऑपरेटरों के लिए कर्ज को चुकाना मुमकिन नहीं होगा। ऑपरेटरों के लिए एसीसी ही एकमात्र माध्यम है, जिससे इनकी आर्थिकी चलती है।
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एसीसी सीमेंट फैक्ट्री से सीमेंट की ढुलाई के लिए ही ऑपरेटरों ने बैंक से कर्ज लेकर ट्रक लिए थे। अब अदाणी समूह ने प्लांट में ताला जड़ दिया है। कर्ज में अगर बात हिमाचल प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक की करें तो इस बैंक में करीब 500 ऑपरेटरों का करीब नौ करोड़ का पुराना कर्ज है। 41 करोड़ का कर्ज नए ट्रकों का है। परेशानी यह है कि अगर प्लांट बंद हो जाटा है तो इन ट्रकों के लिए अन्य काम के अवसर न के बराबर हैं।
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प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक की बरमाणा शाखा में ऑपरेटरों का सबसे अधिक कर्ज करीब 35 करोड़ है। अन्य बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से भी कर्ज लिया गया है। हालांकि, कुछ ऑपरेटरों ने एक किस्त अपनी बचत से चुका दी थी, लेकिन बीडीटीएस के करीब 2400 ट्रकों में से 70 फीसदी यानी करीब 1500-1600 ट्रक ऑपरेटर इस बार बैंक की किस्त चुकाने में सक्षम नहीं होंगे।


बीडीटीएस के कार्यालय सचिव नंद लाल ने कहा कि जैसे-तैसे ऑपरेटरों ने पिछली किस्त चुका दी थी। इस बार किस्त चुकाना संभव नहीं है। कुछ बचा है उससे परिवार की रोजी-रोटी चल रही है। अगर सरकार ने प्रयास नहीं किए और सीमेंट प्लांट जल्द न खुला तो ऑपरेटरों को बैंक डिफाल्टर घोषित कर देगा।

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