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पीएचडी में प्रवेश का मामला: एसएफआई ने किया प्रदर्शन, एचपीयू के वीसी से पूछा ये सवाल
Tue, 19 Oct 2021 07:37 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 19 Oct 2021 07:37 PM IST
सार
एसएफआई नेताओं ने आरोप लगाया कि विवि को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है। इकाई अध्यक्ष विवेक राज और सचिव रॉकी ने कहा कि पीएचडी में चहेतों को बैक डोर तरीके से भर्ती किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से जारी सफाई में यह कहा गया कि इससे विवि के निम्न वर्ग के कर्मचारियों के बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करवाने के लिए यह फैसला लिया गया है।
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एसएफआई ने किया प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बिना प्रवेश पीएचडी में प्रवेश देने के मामले में मंगलवार को एसएफआई ने धरना-प्रदर्शन किया। एसएफआई नेताओं ने आरोप लगाया कि विवि को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है। इकाई अध्यक्ष विवेक राज और सचिव रॉकी ने कहा कि पीएचडी में चहेतों को बैक डोर तरीके से भर्ती किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से जारी सफाई में यह कहा गया कि इससे विवि के निम्न वर्ग के कर्मचारियों के बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करवाने के लिए यह फैसला लिया गया है। यह सफाई समझ से परे है। क्या इस निम्न श्रेणी में विवि के कुलपति भी आते हैं।
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कर्मचारियों के बच्चों को सिर्फ एक लाख की फीस अदा कर बिना प्रवेश परीक्षा, नेट जेआरएफ परीक्षा के सीधे दाखिल दिया जा रहा है। विवेक ने कहा कि यह शर्मनाक है कि नेट-जेआरएफ पास विद्यार्थियों को पीएचडी में प्रवेश नहीं मिल रहा है। अधिकारियों के बच्चे सीधे प्रवेश पा रहे हैं। दीन दयाल उपाध्याय पीठ में सिर्फ एक विशेष विचारधारा के लोगों को भर्ती किया गया। इसका कोई विज्ञापन नहीं निकाला गया।
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विवि ने जो सफाई दी है कि वेबसाइट पर इसकी अधिसूचना जारी की गई थी। वास्तविकता यह है कि पीएचडी प्रवेश के लिए जारी न तो किसी विज्ञापन में ऐसी कोई सीट आरक्षित किए जाने की बात थी, और नहीं आम कर्मचारियों को इसकी भनक लगने दी गई। गुपचुप तरीके से सिर्फ चंद अधिकारियों को ही फैसले की जानकारी थी, उन्हीं के बच्चों ने आवेदन किया और सीधे प्रवेश पाया। हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया अटकी हुई है। विवि का ऑनलाइन ईआरपी सिस्टम छात्रों और कर्मचारियों को प्रताड़ित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है।
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इकाई अध्यक्ष विवेक राज ने कहा कि विवि प्रशासन अंदर खाते अपने चहेतों को हर तरह के लाभ देने में जुटा है। इन सभी धांधलियों का पर्दाफाश न हो और इसके खिलाफ आवाज न उठे। इसलिए विवि प्रशासन ने अब तक विवि को खोलने पर फैसला नहीं लिया है। जबकि पूरे प्रदेश भर के कॉलेज, स्कूल तक खुल चुके हैं।