फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   CAG report: Himachal govt unable to control debt-Gross State Domestic Product ratio

कैग रिपोर्ट: ऋण-सकल राज्य घरेलू उत्पाद अनुपात को नियंत्रित करने में असमर्थ रही हिमाचल सरकार

Wed, 05 Apr 2023 08:17 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 05 Apr 2023 08:17 PM IST
सार

वर्ष 2021-22 के दौरान सरकार 15वें वित्तायोग के निर्धारित लक्ष्य के भीतर कुल बकाया ऋण-सकल राज्य घरेलू उत्पाद अनुपात को नियंत्रित करने में असमर्थ रही। 

विज्ञापन
CAG report: Himachal govt unable to control debt-Gross State Domestic Product ratio
भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान सरकार 15वें वित्तायोग के निर्धारित लक्ष्य के भीतर कुल बकाया ऋण-सकल राज्य घरेलू उत्पाद अनुपात को नियंत्रित करने में असमर्थ रही। हालांकि, सकल राज्य घरेलू उत्पाद का राजस्व एवं राजकोषीय घाटा 15वें वित्त आयोग की ओर से निर्धारित स्तरों व बजट अनुमानों में निर्धारित लक्ष्य के भीतर रहा। यह खुलासा मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से बुधवार को सदन के पटल पर रखी कैग रिपोर्ट में हुआ है। 31 मार्च, 2022 को समाप्त वर्ष का सरकार के लिए भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का राज्य के वित्त पर लेखापरीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2023 का प्रतिवेदन संख्या-2 भारत के संविधान के अनुच्छेद 151 के प्रावधान के तहत तैयार किया गया है।

विज्ञापन


यह प्रतिवेदन सरकार को 27 मार्च 2023 को भेजा गया। बुधवार को विस के पटल पर रखा गया। इसके अनुसार राज्य सरकार ने अप्रैल 2005 में हिमाचल प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम पारित किया। घाटे व ऋण स्तर के लिए पुनरीक्षित लक्ष्य निर्धारित करने को हिमाचल प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम में संशोधन की जरूरत थी। हालांकि, सरकार ने इस प्रकार का कोई संशोधन नहीं किया।
विज्ञापन


राजकोषीय घाटा 455 करोड़ घट गया
2021-22 में 2020-21 का राजस्व घाटा 97 करोड़ राजस्व अधिशेष 1,115 करोड़ रुपये में बदल गया। राजकोषीय घाटा 5,245 करोड़ पिछले वर्ष के 5,700 करोड़ रुपये की तुलना में 455 करोड़ रुपये घट गया। प्राथमिक घाटा वर्ष 2020-21 के 1,228 करोड़ से घटकर वर्ष 2021-22 के दौरान 604 करोड़ हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजस्व प्राप्तियों में पिछले वर्ष की तुलना में 11.58 प्रतिशत की वृद्धि
2021-22 के दौरान राजस्व प्राप्तियों में पिछले वर्ष की तुलना में 3,871 करोड़ रुपये यानी 11.58 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2021-22 में हुई वृद्धि मुख्य रूप से केंद्रीय करों और शुल्कों में राज्यांश में 2,595.12 करोड़ यानी 54.59 प्रतिशत, राज्य के स्व कर राजस्व में 1,631.27 करोड़ यानी 20.18 प्रतिशत और कर-भिन्न राजस्व में 423.90 करोड़ यानी 19.37 प्रतिशत की प्राप्तियों में कृषि के कारण हुई थी। यह वृद्धि भारत सरकार से प्राप्त सहायता अनुदान से 779.26 करोड 4.23 प्रतिशत की गिरावट से आंशिक रूप से समायोजित हो गई।

2017-22 में कुल व्यय में 36.06 प्रतिशत की वृद्धि
पांच वर्ष की अवधि में 2017-22 में कुल व्यय में 11,290.53 करोड़ रुपये यानी 36.06 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2021-22 के दौरान यह गत वर्ष की अपेक्षा 3.437.63 करोड़ 8.78 प्रतिशत बढ़ गया। वर्ष 2017-22 के दौरान सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में कुल व्यय 22.60 प्रतिशत से 25 प्रतिशत के मध्य रहा। 2017-22 के दौरान राजस्व व्यय में 33.79 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी दौरान पूंजीगत व्यय में 50.47 प्रतिशत की वृद्धि हुई। गत वर्ष की तुलना में 2021-22 के दौरान प्रतिबद्ध व्यय में वृद्धि 767.71 करोड़ यानी 3.42 प्रतिशत थी 2017-18 से 2021-22 की अवधि के दौरान राजस्व व्यय यानी 65-71 प्रतिशत एवं राजस्व प्राप्तियों में 62-70 प्रतिशत का एक बड़ा अंश दर्ज किया गया। गत पांच वर्षों में पूंजीगत परिव्यय में सतत वृद्धि की प्रवृत्ति देखी गई। 2017-22 में इसमें 2,273,71 करोड़ यानी 60.54 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2021-22 के दौरान पूंजीगत परिव्यय यानी 6.029.38 करोड़ गत वर्ष 2020-21 में 5,309.22 करोड़ रुपये से 720.16 करोड़ यानी 13.56 प्रतिशत बढ़ गया।

कंपनियों एवं सहकारिताओं में किए कुल निवेश को 4,913 करोड़ पर 3.39 प्रतिशत किया
2021-22 के दौरान सरकार ने 31 मार्च 2022 तक सांविधिक निगमों, ग्रामीण बैंकों, सरकारी कंपनियों एवं सहकारिताओं में किए उसके कुल निवेश यानी 4,913 करोड़ पर 3.39 प्रतिशत किया। वस्तु व सेवा कर क्षतिपूर्ति गिरावट के बदले भारत सरकार से राज्य को एक के बाद एक प्राप्त ऋण हो गई तथा 35.45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जिसका मुख्य कारण भारत सरकार से आंतरिक ऋण 10,784.56 करोड़, ऋण व अग्रिम 1,259.76 करोड़ एवं लोक लेखा देयताओं यानी 6,047.75 करोड़ रुपये में वृद्धि था।


5,585.36 करोड़ यानी 10 प्रतिशत की बचत हुई
वर्ष 2021-22 में व्यय के लिए कुल बजट प्रावधान 55,714.72 करोड़ था। वर्ष के दौरान वास्तविक व्यय 50,129.36 करोड़ यानी 90 प्रतिशत थी। इसके परिणामस्वरूप 5,585.36 करोड़ यानी 10 प्रतिशत की बचत हुई।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed