चुनावी बिगुल बजते ही टिकट के तलबगारों ने लगाई दिल्ली की दौड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा और कांग्रेस में गुटबाजी के चलते मचे घमासान के बीच जैसे ही उपचुनाव की तारीख की घोषणा हुई, टिकट के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे टिकटार्थियों ने दिल्ली की दौड़ लगा दी। हालांकि, कुछेक तलबगार पहले से ही दिल्ली में डेरा डालकर टिकट पक्की करने के जुगाड़ में लगे हुए हैं। कांग्रेस से सुधीर शर्मा पिछले तीन दिन से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित राहुल गांधी, अहमद पटेल और अन्य कई नेताओं से मिलने का प्लान लेकर गए हैं।
उधर, भाजपा से करीब आधा दर्जन प्रत्याशियों की धुकधुकी बढ़ गई है। इक्का दुक्का टिकटार्थियों को छोड़कर बाकी संभावित उम्मीदवारों ने दिल्ली कूच कर दिया है। दिल्ली कूच के लिए किसी ने हवाई जहाज पकड़ा तो कोई अपनी गाड़ी लेकर ही रवाना हो गया। उधर, कई भाजपाई टिकट के लिए धूमल, नड्डा, शांता और जयराम गुट के आसरे हैं। कई आरएसएस और संगठन में अपनी कठिन तपस्या का फल मिलने के इंतजार में आस लगाए बैठे हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों तीन चार दिन में प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर सकती हैं।
भाजपा और कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार
उमेश दत्त, विशाल नैहरिया, राजीव भारद्वाज, सचिन शर्मा, संजय शर्मा, राकेश शर्मा और आनंद शर्मा का नाम भाजपा की टिकट की रेस में चल रहा है। कांग्रेस से सुधीर शर्मा का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। हालांकि, एमसी के मेयर देवेंद्र जग्गी और विजय इंद्र कर्ण के नाम पर भी विचार किया जाएगा।
दिल्ली में डेरा जमाए बैठे हैं कपूर
अपने बेटे शाश्वत को टिकट के लिए मना होने के बाद नाराज सांसद किशन कपूर पिछले 3 दिन से दिल्ली में डेरा जमाए बैठे हैं। कपूर 26 सितंबर को दिल्ली से धर्मशाला पहुंचेंगे। कपूर दिल्ली में लगातार कई नेताओं से मिल रहे हैं जिसके राजनीतिक गलियारों में कई सियासी अर्थ निकाले जा रहे हैं। दिल्ली में कपूर अपने बेटे को विदेश भेजने के लिए वीजा की औपचारिकताओं को भी पूरा करवाने में लगे हैं।
करो और मरो की लड़ाई
धर्मशाला उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए करो और मरो की लड़ाई की तरह है। मुख्यमंत्री बनने के बाद जयराम ठाकुर के लिए उपचुनाव में पहली बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मोदी मैजिक चलने के बाद अब उपचुनाव में मुख्यमंत्री के कामकाज को जनता की ओर से कसौटी पर परखा जाएगा। उधर, कई गुटों में बिखरी और धर्मशाला में दो साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस उपचुनाव को संजीवनी के रूप में देख रही है।