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शोध: गन्ने के भूसे पर उगी मशरूम खाने से दूर भागेगा मधुमेह और मोटापा
Sat, 14 Aug 2021 01:17 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 14 Aug 2021 01:17 PM IST
सार
दिल के लिए फायदेमंद, मशरूम में मौजूद फाइबर, पोटेशियम, विटामिन सी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखते हैं। वहीं मशरूम में भरपूर मात्रा में विटामिन डी, कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है, यह हड्डियों को मजबूत रखती है।
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मशरूम
- फोटो : iStock
विस्तार
हिमाचल में अब गन्ने के भूसे पर मशरूम की खेती होगी। इससे मशरूम की गुणवत्ता और बेहतर होगी। खास बात यह होगी कि दिल की बीमारी, मधुमेह और मोटापे को दूर करने के लिए रामबाण साबित होगा। अब तक मशरूम की खेती गेहूं के भूसे पर होती आई है। हिमाचल के अलावा हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, यूपी और बिहार में भी भूसे पर ही खेती की जाएगी। इससे जहां किसानों को भूसे का पैसा तो मिलेगा ही साथ में मशरूम के लिए भूसे की कमी भी दूर होगी। बिना ज्यादा जगह और लागत के उत्पादकों की आमदनी भी दोगुनी हो जाएगी। खुंब निदेशालय चंबाघाट के विशेषज्ञों ने इसका सफल प्रशिक्षण कर लिया है।
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गन्ने के भूसे पर तैयार मशरूम से आठ प्रतिशत अधिक पैदावार होगी। वहीं गन्ने के भूसे की खाद तैयार करने का खर्चा भी आधा हो जाएगा। प्रदेश में गेहूं की कम पैदावार होती है। इस कारण यहां के किसान गेहूं का भूसा बाहरी राज्यों से खरीद करते हैं। यहां से खरीदा गया भूसा किसानों के लिए महंगा पड़ता है। लेकिन गन्ने के अवशेष से तैयार किए गए भूसे का प्रयोग बटन मशरूम खाद के लिए किया जाएगा। जिससे गन्ना उत्पादकों को भी लाभ मिलेगा।
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बटन मशरूम के ये फायदे
दिल के लिए फायदेमंद, मशरूम में मौजूद फाइबर, पोटेशियम, विटामिन सी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखते हैं। वहीं मशरूम में भरपूर मात्रा में विटामिन डी, कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है, यह हड्डियों को मजबूत रखती है। कैंसर से बचाए रखने में सहायक समेत प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
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डीएमआर सोलन के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने कहा कि बटन मशरूम को गन्ने के भूसे पर तैयार करने का सफल प्रशिक्षण किया है। इसका लाभ किसानों को भी मिलेगा। गन्ने के अवशेष से तैयार भूसा गेहूं से आधे दामों में मिल जाएगा। मशरूम की पैदावार भी आठ प्रतिशत अधिक होगी। मशरूम प्रोटीन से भरपूर है।