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Shimla News: दुकान सबलेट के मामले पर सदन में घुस गया कारोबारी
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पार्षदों ने उठाए सवाल, केस दर्ज करने की मांग
अधिकारियों को दिए निर्देश, सदन में अज्ञात लोगों को न आने दें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम सदन में शनिवार को रामबाजार की पार्षद सुषमा कुठियाला ने जैसे ही दुकान की सबलेटिंग का मामला उठाया कि अचानक इस दुकान का कारोबारी सदन में पहुंच गया।
नियमानुसार चुने हुए प्रतिनिधि और अधिकारी ही सदन में आ सकते हैं। अचानक सदन में कारोबारी को देख सभी पार्षद दंग रह गए। इसे देखते ही हंगामा मच गया। पार्षदों ने पूछा कि आखिर सदन में कारोबारी कैसे घुस गया। उधर कारोबारी सदन में अपना पक्ष रखने पर अड़ गया लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिली। महापौर और आयुक्त ने इसे बाहर निकालने के निर्देश दिए। कर्मचारियों ने इसे बाहर भेजा। पार्षद सुषमा कुठियाला ने सवाल पूछा था कि निगम ने आगजनी प्रभावित एक कारोबारी को 1990 में 11 महीने के लिए लक्कड़ बाजार में दुकान दी थी। लेकिन 11 महीने बाद भी इसे खाली क्यों नहीं करवाया गया।
उन्होंने कहा कि कि एक तो निगम 11 माह बाद दुकान खाली करने में नाकाम रहा, दूसरा इससे किराया तक नहीं लिया। प्रशासन ने कहा कि यह सबलेटिंग का मामला है। इसने दुकान अपने नाम करने का आवेदन किया था जिस पर सरकार से मंजूरी आनी बाकी है। पार्षद ने कहा कि साल 2022 में इसका आवेदन सरकार खारिज कर चुकी है। फिर भी निगम मेहरबान क्यों है। बाकी पार्षदों ने सदन में कारोबारी के घुसने पर सवाल उठाए। साथ ही इस पर केस दर्ज करने की मांग की। मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में कोई अज्ञात व्यक्ति सदन में न घुसे। सदन ने मेयर में दिल्ली दौरे को लेकर भी जानकारी दी। दिल्ली में हुए सम्मेलन में पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग अनुदान देने का मामला उठाया है। सदन ने इसे प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजने को मंजूरी दी।
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अधिकारियों को दिए निर्देश, सदन में अज्ञात लोगों को न आने दें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम सदन में शनिवार को रामबाजार की पार्षद सुषमा कुठियाला ने जैसे ही दुकान की सबलेटिंग का मामला उठाया कि अचानक इस दुकान का कारोबारी सदन में पहुंच गया।
नियमानुसार चुने हुए प्रतिनिधि और अधिकारी ही सदन में आ सकते हैं। अचानक सदन में कारोबारी को देख सभी पार्षद दंग रह गए। इसे देखते ही हंगामा मच गया। पार्षदों ने पूछा कि आखिर सदन में कारोबारी कैसे घुस गया। उधर कारोबारी सदन में अपना पक्ष रखने पर अड़ गया लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिली। महापौर और आयुक्त ने इसे बाहर निकालने के निर्देश दिए। कर्मचारियों ने इसे बाहर भेजा। पार्षद सुषमा कुठियाला ने सवाल पूछा था कि निगम ने आगजनी प्रभावित एक कारोबारी को 1990 में 11 महीने के लिए लक्कड़ बाजार में दुकान दी थी। लेकिन 11 महीने बाद भी इसे खाली क्यों नहीं करवाया गया।
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उन्होंने कहा कि कि एक तो निगम 11 माह बाद दुकान खाली करने में नाकाम रहा, दूसरा इससे किराया तक नहीं लिया। प्रशासन ने कहा कि यह सबलेटिंग का मामला है। इसने दुकान अपने नाम करने का आवेदन किया था जिस पर सरकार से मंजूरी आनी बाकी है। पार्षद ने कहा कि साल 2022 में इसका आवेदन सरकार खारिज कर चुकी है। फिर भी निगम मेहरबान क्यों है। बाकी पार्षदों ने सदन में कारोबारी के घुसने पर सवाल उठाए। साथ ही इस पर केस दर्ज करने की मांग की। मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में कोई अज्ञात व्यक्ति सदन में न घुसे। सदन ने मेयर में दिल्ली दौरे को लेकर भी जानकारी दी। दिल्ली में हुए सम्मेलन में पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग अनुदान देने का मामला उठाया है। सदन ने इसे प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजने को मंजूरी दी।
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