शिवनगरी में रावण का पुतला जलाना समझा जाता है पाप
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देश भर में दशहरा पर्व मानया जाता है। लेकिन, बैजनाथ की शिव भूमि में दशहरा मनाना तो दूर की बात है। इसके बारे में सोचना भी पाप समझा जाता है। शिव भक्त रावण की तपोस्थली के रूप में विश्व विख्यात बैजनाथ में रावण के दहन को पाप समझा जाता है।
पिछले 40 वर्षों से अधिक समय से यहां पर रावण का दहन नहीं किया गया है। माना जाता है कि भगवान शिव अपने सामने अपने प्रिय भक्त रावण का दहन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकते।
ऐसा नहीं है कि यहां पर रावण दहन नहीं किया गया हो। 70 के दशक में शिव मंदिर के सामने स्थित मैदान में दशहरा रावण दहन के साथ समाप्त होता था। माना जाता है कि उस समय जिस किसी भी व्यक्ति या कीर्तन मंडली ने रावण दहन में भूमिका अदा की, वह संकट से घिर गया।
सोने की लंका काली, इसलिए यहां नहीं होता सोने का व्यापार
यही नहीं, पर्व में अहम भूमिका निभाने वाले तीन स्थानीय लोगों की अकस्मात मौत तक हो गई। कस्बे में एक भी सुनार की दुकान नहीं है। दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित पपरोला बाजार पूरे प्रदेश में सोने की खरीददारी के लिए प्रसिद्ध है।
लेकिन बैजनाथ में सोने का व्यापार नहीं होता। मंदिर पुजारी राम शर्मा ने बताया कि रावण ने यहां पर तपस्या की थी। सोने की लंका के काले पड़ जाने के कारण यहां पर आज तक एक भी सोने की दुकान स्थापित नहीं हो पाई है। कुछ लोगों ने प्रयास जरूर किए जो विफल रहे।