हिमाचल विस चुनावः किसकी बनेगी सरकार, नौकरशाह भी जानने के लिए बेकरार
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हिमाचल में सत्ता की कमान किस दल के हाथ में होगी, इसका खुलासा 18 दिसंबर को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद हो सकेगा। नेता से लेकर कार्यकर्ता और अफसर से लेकर कर्मचारी तक सब वक्त से पहले नतीजे जान लेना चाहते हैं।
इस बेताबी से प्रदेश के नौकरशाह भी अछूते नहीं हैं। परिणाम न सही पर रुझानों को लेकर उनमें भी उतनी ही बेचैनी है। आचार संहिता के चलते रोजमर्रा के कामकाज के बीच सचिवालय में किसी भी अधिकारी के कमरे से लेकर गलियारों में एक ही सवाल है कि सरकार किसकी बनेगी।
कांग्रेस का मिशन रिपीट होने से नौकरशाही में किसका दबदबा रहेगा, अगर भाजपा आई तो किन अधिकारियों के पर कुतरे जाएंगे, इसकी खूब चर्चा है। एक नौकरशाह के कमरे के बाहर उनसे मिलने कुछ जूनियर अधिकारी, राजनीति से संबंध रखने वाले एक नेता और कुछ अन्य लोग इंतजार कर रहे थे।
आपस में परिचित थे या नहीं, लेकिन बात करने के लिए सबका विषय एक ही था कि सरकार किसकी बनेगी। एक साहब वहां कांग्रेस के मिशन रिपीट के खिलाफ कोई तर्क सुनने को तैयार नहीं थे। उनको राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति का समर्थन था।
मतदाता चुप हैं, जिससे आइडिया लगा पाना आसान नहीं
अन्य खुलकर नहीं बोले, लेकिन कुछ हॉट सीटों सुजानपुर, अर्की, जोगिंद्रनगर, शिमला शहर और ग्रामीण में सबकी रुचि दिखी। यह हाल लगभग अधिकांश कमरों का था।
मंडी और कांगड़ा जिला सबसे हॉट रहे। सब कहीं बढ़े मतदान के सियासी मायने एंटी इंकंबेंसी से जोड़कर बताया जा रहा था तो कहीं पर सरकार के खिलाफ कोई अंडर करंट नहीं होने के बात कही जा रही थी। एक अधिकारी ने बताया कि मतदाता चुप हैं, जिससे आइडिया लगा पाना आसान नहीं।
शिमला के होते हुए उनकी भी रुचि कांगड़ा के समीकरण जानने की अधिक थी। बातों-बातों में वहां अपने कुछ अधिकारियों को फोन करने कुछ सीटों का गणित भी ले लिया। सचिवालय के गलियारों में गुजरते हुए भी कानों में रह-रहकर यह बात सुनाई दे रही थी कि फलां सीट पर यह जीतेगा तो फलां पर मुकाबला कड़ा है।
निजाम बदला तो होगा फेरबदल
नए निजाम के लिए अफसरशाही पसंद और नापसंद हमेशा महत्व रखती है। दूसरे राज्यों की तरह हिमाचल में कुछ नौकरशाह दो धुरियों में बंटे दिखते हैं, जबकि कुछ खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेते हैं, लेकिन जब बात नहीं बनती तो अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर चले जाते हैं। ऐसी यहां परंपरा सी है। यही वजह है सत्ता परिवर्तन होते ही नौकरशाही का स्वरूप बदल जाता है।
मिसाल के तौर पर जिन नौकरशाहों की भाजपा में तूती बोलती थी, निजाम बदलते ही वे नेपथ्य में चले गए और उनकी जगह नए चेहरों ने ले ली। कुछ अफसर तो सत्ता बदलने पर मुख्यमंत्री सचिवालय के नए अधिकारी तक तय कर चुके हैं। शायद यही वजह है नौकरशाह परिणाम जानने को इतने बेताब हैं।
सीएम वीरभद्र और मंत्री विद्या बैठे दफ्तर में
मतदान के बाद सोमवार को एक बार फिर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कैबिनेट मंत्री विद्या स्टोक्स ने दफ्तर में कामकाज संभाला। उनके स्टाफ के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने रुटीन के कामकाज को देखा।
आदर्श आचार संहित के बावजूद जिन कार्यों को किया जा सके उनके बारे में अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि जनहित के कामकाज निपटाए जाएं।
चुनाव आयोग के पास लंबित प्रकरणों के बारे में भी सीएम को अवगत करवाया गया। दोपहर बाद मुख्यमंत्री रामपुर के लिए निकल गए। मंगलवार को लवी मेले में बतौर मुख्यातिथि सम्मिलित होंगे। उधर, विद्या स्टोक्स दिनभर अपने कार्यालय में रहीं।