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चालक की बहादुरी से सकुशल जिस्पा पहुंचे 13 बौद्ध भिक्षु

Fri, 28 Sep 2018 01:17 PM IST
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल स्पीति)
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल स्पीति) Updated Fri, 28 Sep 2018 01:17 PM IST
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Buddhist monks rescued safely by the help of brave driver in lahaul spiti

एक टैक्सी चालक की बहादुरी और अनुभव ने 13 विदेशी बौद्ध भिक्षुओं और श्रद्धालुओं को सकुशल जिस्पा पहुंचाया। हालांकि इन विदेशी बौद्ध अनुयायियों के साथ आए अन्य 60 लोग इतने भाग्यशाली नहीं रहे। ये लोग अभी भी भरतपुर में पिछले 4 दिनों से बर्फ में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। 

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ये सभी लोग लद्दाख में नारोपा फेस्टिवल में शामिल होकर 22 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे 2 बसों और एक टैंपो ट्रेवलर में मनाली की तरफ निकले थे। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल की सीमा सरचू से बर्फबारी शुरू हो गई।
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ट्रेवलर के चालक वांगचुग ने बताया कि बर्फबारी को देख कर वह भांप गए थे कि यह आफत लाने वाली है। लिहाजा, वांचुग ने वाहन को बर्फबारी के बीच अधिकतम गति से दौड़ाया।
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हालांकि बर्फीली तूफान के बीच इस दौरान उनका वाहन दो बार दुर्घटना होने से बाल बाल बचा। वाहन में सवार भूटान निवासी नमथर और वीसी डोलकर ने बताया कि चालक की सूझबूझ और बहादुरी से वे लोग मौत के चंगुल से निकलने में कामयाब हुए। 

80 किमी का सफर खौफ के साये में पूरा हुआ

Buddhist monks rescued safely by the help of brave driver in lahaul spiti

हालांकि बीच रास्ते में बर्फबारी को देख कर वाहन में सवार कुछ बौद्ध भिक्षुओं की हिम्मत टूटने लगी थी। वाहन में सवार नेपाल के बौद्ध भिक्षु मिग्मर के मुताबिक सरचू से जिस्पा तक 80 किमी का सफर खौफ के साये में पूरा हुआ।

उन्हें इस बात का बेहद अफसोस है कि उनके 60 अन्य साथी अभी भी बर्फ के बीच भरतपुर में फंसे हैं। चालक वांगचुग ने बताया कि उसे इस सड़क पर चलने का 15 सालों का अनुभव है।

उन्हें पता था कि बर्फबारी के बीच रास्ते में रुकना जानलेवा साबित हो सकता है। लिहाजा, उन्होंने जोखिम उठा कर बेहद कम विजिबिलिटी के बावजूद वाहन को अधिकतम गति से दौड़ाया।

बताया कि शाम 6 बजे वह जिस्पा पहुंचे। तब तक सड़क पर 2 फुट से अधिक बर्फ जम चुकी थी। फिलहाल यह 13 भूटानी और नेपाली बौद्ध भिक्षु भरतपुर में फंसे हैं। अन्य साथियों के रेस्क्यू होने का इंतजार कर रहे हैं।

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