रोहड़ू में 15 करोड़ से बन रहा बखीरना पुल पूरा होने से पहले ही धराशायी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू में पब्बर नदी पर 15 करोड़ 81 लाख रुपये से बनाया जा रहा निर्माणाधीन बखीरना पुल पूरा होने से पहले ही धराशायी हो गया। पुल का निर्माण कार्य 15 जुलाई 2018 से शुरू किया गया था, जिसे वीकेजी नामक चंडीगढ़ बेस्ड कंपनी बना रही थी। पुल टूटने से जहां सरकार को करोड़ों का नुकसान नुकसान हुआ वहीं, अब हजारों की आबादी को अब पुल की सुविधा महरूम होना पड़ेगा। पुल के टूटने से लोनिवि की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खडे़ हो गए हैं। अभी हाल ही में रहोड़ू दौरे पर पहुंचे शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी इस पुल के निर्माण कार्य का जायजा लिया था।
लोनिवि के मुताबिक पुल बनाने का काम 15 जुलाई 2018 से शुरू हुआ था। लॉकडाउन तक निर्माण कार्य पर 12 करोड़ खर्च हो चुके हैं। पुल की लंबाई 96 फीट है। इसमें 66 फीट लंबा पुल का भाग पूरी तरह गिर गया है। बताया जा रहा कि इस पुल की शैटरिंग कुछ दिनों पहले ही उतारी गई थी।
मंगलवार को करीब 2 बजकर 15 मीनट के करीब पुल के टूटने के बाद एसडीएम रोहडू बीआर शर्मा अैर डीएसपी रोहडू टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और घटना का जायजा लिया।डीएसपी रोहडू सुनील नेगी ने बताया कि इस पुल के टूटने से किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नही है। वहीं घटना को लेकर पुलिस जांच में जुट गई है।
सहायक अभियंता लोनिवि नरेंद्र नायक ने बताया कि पुल टूटने का कारण प्राथमिक रूप से इसका कारण डिजायन फेलियर माना जा रहा है। विभाग किसी भी कार्य निर्माण के समय प्रयुक्त होने वाली सामग्री बारीकी से परखता है। फिर भी कोई भूल-चूक रह गई होगी तो इसकी जांच में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने बखीरना पुल के ढह जाने पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि इसमें कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। पुल के ढह जाने से भारी नुकसान हुआ है। विधायक ने इस लापरवाही पर रोष जाहिर करते हुए कहा कि इस घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसमें चाहे लोक निर्माण विभाग के अधिकारी हों या ठेकेदार, सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।