3 घंटे चला ऑपरेशन, 15 साल की बच्ची को डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिमला के आईजीएमसी के सीटीवीएस विभाग ने 15 साल की लड़की की विकृत छाती का ऑपरेशन कर उसे नई जिंदगी दी है। बिलासपुर की घुमारवीं की रहने वाली बनीता की छाती के बायां हिस्सा अंदर धंस गया था। इससे लड़की को सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी।
फेफड़ों पर भी इसका असर पड़ रहा था। चिकित्सकों का कहना है कि शरीर में इस तरह छाती का अंदर धंसना काफी घातक होता है। ऐसा होने पर ब्लड प्रेशर तथा दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। समय रहते इलाज न जाए तो हार्ट पर प्रेशर पड़ने से मौत भी हो सकती है।
तीन घंटों तक डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन किया। हिमाचल में इस तरह के उपकरणों के न मिलने के कारण भी ऑपरेशन में देरी हो रही थी।
सीएम राहत कोष से भी ली मदद, डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
सीटीवीएस विभाग के डॉक्टर रजनीश पठानिया ने दावा किया कि ऐसे ऑपरेशन को करने के लिए मरीजों को दिल्ली तथा प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ता था। जहां पर ऑपरेशन का भारी भरकम खर्च होता है।
लड़की के ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने छाती के एक्सरे तथा सीटी स्कैन करवाए गए। उसके बाद ही लड़की का ऑपरेशन किया गया। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह के ऑपरेशन को नस प्रोसीजर भी कहा जाता है जबकि ऑपरेशन के दौरान मरीज का 70 से लेकर 80 हजार रुपये का खर्चा आता है।
मुख्यमंत्री राहत कोष से लड़की के ऑपरेशन के लिए कई मर्तबा पैसे निकाले गए थे लेकिन साधनों के न होने के कारण ऑपरेशन टल रहे थे। स्कूल हेल्थ प्रोग्राम में लड़की का ऑपरेशन करवाया गया।
यह रही टीम
सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीश पठानिया, डॉ. अजय चौहान, डॉ. प्रवीण धौल्टा, स्टाफ से अर्चना धौल्टा, और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. यशवंत वर्मा ने सफल ऑपेरशन करवाने में सहयोग प्रदान किया।