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Shimla News: क्रिसमस से पहले मिलेंगे शुंगल टनल के दोनों छोर

Thu, 05 Dec 2024 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2024 11:59 PM IST
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Both ends of Shungal Tunnel will meet before Christmas
कैथलीघाट से ढली तक 15 किमी तक घटेगी दूरी, टनल का अब 30 मीटर बचा है कार्य
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700 मीटर लंबी होगी सुंगल टनल, सुरक्षित होगा सफर
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कालका-शिमला फोरलेन के ढली-कैथलीघाट हिस्से में चल रहे शुंगल टनल का निर्माण कार्य क्रिसमस (25 दिसंबर से पहले) तक पूरा हो जाएगा।

705 मीटर लंबी दो समानांतर टनलों में से एक का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इसके दोनों छोर अगस्त माह में मिल गए थे। दूसरी टनल भी अब लगभग तैयार है जिसका केवल 30 मीटर कार्य बचा है। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, इसका ब्रेकथ्रू (दोनों छोर मिलाने का कार्य) क्रिसमस तक पूरा कर लिया जाएगा।
यह परियोजना शिमला और आसपास के क्षेत्रों में यातायात को सुगम तथा सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण साबित होगी। शुंगल में प्रत्येक टनल का निर्माण 90 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। टनलों को सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया है। इनमें उच्च क्षमता वाले वेंटिलेशन पंखे, एलईडी लाइट, स्मोक (धुआं) सेंसर, अग्निशमन प्रणाली और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए हैं। इससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। समानांतर टनल आपातकालीन स्थिति में वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी उपयोगी होगी।
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शुंगल टनल शिमला बाईपास परियोजना का हिस्सा है जो कैथलीघाट से ढली तक राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (एनएच-5) को चौड़ा करने के लिए बनाई जा रही है। इस परियोजना की लंबाई 28.45 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत 4800 करोड़ रुपये है। इसमें 10 टनल और 27 पुल बनाए जा रहे हैं। इस परियोजना के पूरा होने के बाद कैथलीघाट से ढली तक की दूरी लगभग 15 किलोमीटर कम हो जाएगी जिससे यात्रा का समय भी घटेगा।
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पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया है। परियोजना के दौरान लगभग 22,500 पेड़ों को कटने से बचाया गया है। साथ ही टनलों और चौड़ी सड़कों के निर्माण से वाहनों के ईंधन की खपत में कमी आएगी जिससे वायु प्रदूषण कम होगा। शुंगल टनल और शिमला बाईपास परियोजना के पूरा होने से शिमला के यातायात प्रबंधन में सुधार होगा। परियोजना से न केवल यात्रा सुगम होगी बल्कि क्षेत्र में आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ भी होंगे।




कोट
क्रिसमस तक टनल के दोनों छोर मिल जाएंगे। लगभग 30 मीटर की खुदाई बची है। फोरलेन का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है और 2026 तक फोरलेन का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
-योगेश वर्मा, साइट इंजीनियर, एनएचएआई
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