अनुपम खेर बोले- बदल गया शिमला, अब नहीं रही शांति, घर-गाड़ियां ज्यादा हुईं
शिमला प्रवास पर पहुंचे अनुपम खेर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन की यादों को भी साझा किया। अनुपम खेर शुक्रवार को दोस्तों के साथ अपने बचपन के स्कूल लक्कड़ बाजार स्थित डीएवी स्कूल पहुंचे।
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बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता अनुपम खेर की नजर में पहाड़ों की रानी शिमला अब काफी बदल गया है। यहां पहले जैसी शांति नहीं रही। गली-मोहल्ले भवनों से पट गए हैं और आबादी तेजी से बढ़ी है। घूमने निकलो तो सड़कों पर वाहन ही नजर आते हैं। हालांकि, देशव्यापी सर्वे में रहने लायक शहरों में शिमला अभी भी आगे है। शिमला प्रवास पर पहुंचे अनुपम खेर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन की यादों को भी साझा किया।
अनुपम खेर शुक्रवार को दोस्तों के साथ अपने बचपन के स्कूल लक्कड़ बाजार स्थित डीएवी स्कूल पहुंचे। उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल और स्टाफ से मुलाकात कर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने स्कूल के पुराने अध्यापकों के फोटो रोल ऑफ ऑनर के तौर पर लगाने की आवश्यकता भी जताई। उन्होंने कहा कि शिमला मेरा घर है, यहां की खुशबू मेरी आत्मा से जुड़ी है। शिमला में 19 साल की जीवन यात्रा की अनमोल पूंजी मेरे साथ है। उन्होंने कहा कि लोगों का प्यार और यादें उन्हें बार-बार शिमला खींच लाती है।
अनुपम खेर ने कहा कि अपने बचपन के स्कूल आया हूं। यहीं से भागकर दिलीप कुमार की गोपी फिल्म देखी थी। पुरानी यादों को तरोताजा करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदी के अध्यापक मुनि लाल सर से गोपी फिल्म देखने के लिए दो बार डंडे भी खाए थे। अभिनेता दिलीप कुमार भी इस इस रोचक घटनाक्रम से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि उस दौर में बच्चों पर अनुशासन और पढ़ाई की सख्ती ज्यादा थी।
स्कूलों में डंडास परेड परपंरा सी थी। सातवीं कक्षा से आठवीं कक्षा गए तो जयराम सर के डंडों से स्वागत होता था। कहते थे कि ये सोशल स्टडीज का डंडा, एल जेबरा का डंडा और लेट आना का डंडा। रामलाल सर ने मुर्गा भी बनाया। उन्होंने कहा कि स्कूल में जो डंडे अध्यापकों से खाए थे, वो जिंदगी के बड़े सबक बने और अच्छा-बुरे की समझ भी दे गए। पिता की बचपन में मिली नसीहत का भी अनुपम खेर ने जिक्र किया। बोले, नवीं कक्षा में पिता को रिपोर्ट कार्ड दिखाने गया तो उन्होंने कहा कि इवेंट फेल होता है आदमी कभी फेल नहीं होता है।
अनुपम खेर ने सीएम जयराम से की भेंट
प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को फिल्मों की शूटिंग के लिए उपयुक्त प्राकृतिक भव्यता और सुरम्य स्थानों का आशीर्वाद दिया है। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता अनुपम खेर से मुलाकात के दौरान कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने भारतीय सिनेमा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य लोकप्रिय दर्शनीय, सांस्कृतिक, विरासत और आध्यात्मिक स्थलों से भरा हुआ है, जिन्हें अभी खोजा जाना बाकी है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को फिल्म निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में विकसित करने और राज्य की संस्कृति, इतिहास, विरासत और गौरवशाली परंपराओं के बारे में जानकारी प्रसारित करने के लिए राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश फिल्म नीति-2019 बनाई है। उन्होंने कहा कि इस नीति का उद्देश्य राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, फिल्म उद्योगों के माध्यम से अतिरिक्त पूंजी निवेश आकर्षित करना और फिल्मों की शूटिंग के लिए प्रदेश को हर मौसम में विकसित करना है।
अभिनेता अनुपम खेर ने फिल्म नीति बनाने में राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि चूंकि वह स्वयं राज्य से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए वह हिमाचल को फिल्म शूटिंग के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने की पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ अपने बचपन के अनुभव और शिमला की अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. साधना ठाकुर, अनुपम खेर की मां दुलारी खेर, निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क हरबंस सिंह ब्रास्कोन सहित अन्य मौजूद थे।