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नदी में मिल रहा बकरों का खून, सरकार बता रही सबसे साफ पानी

Fri, 29 Jan 2016 09:42 AM IST
Updated Fri, 29 Jan 2016 09:42 AM IST
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blood from slaughter house flowing into Giri river, water supply to shimla.

हिमाचल सरकार जिस पानी के सबसे साफ होने का दावा कर रही है, उसकी सच्चाई कुछ और है। शिमला जिले के ठियोग तहसील के छैला कस्बे के पास गिरि नदी के तट पर रोजाना कई बकरों को काटा जा रहा है और कटे बकरों का खून गिरी नदी के पानी में खुलेआम बहाया जा रहा है।

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प्रगतिनगर-गुम्मा, हुली, छैला, सैंज, लेलुपुल जैसे सभी कस्बों की सीवरेज और गंदा पानी गिरि में ही बहाया जा रहा हैं। सार्वजनिक शौचालयों के अभाव में लोग इसी के तट पर खुले में शौच कर रहे हैं। कपड़े धोने से लेकर पानी को दूषित करने वाले तमाम कार्य यहां हो रहे हैं और इन पर कोई रोक नहीं है।
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सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग का कोई अफसर यहां झांकने तक नहीं जाता। इन कस्बों से आगे माईपुल नाम की जगह से राजधानी शिमला के लिए पानी उठाया जाता है। पीने के पानी में गंदगी के कारण शिमला शहर में पीलिया के हजारों मामले सामने आ रहे हैं। इससे कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं।
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निरीक्षण में सामने आई चौंकाने वाली बातें

blood from slaughter house flowing into Giri river, water supply to shimla.

अश्वनी खड्ड में सीवरेज से युक्त और गंदा पानी पाए जाने के बाद अब गिरि परियोजना के पानी की गुणवत्ता को सही ठहराते हुए सरकार शहरवासियों को इसी का पानी पिला रही है। शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ की टीम ने गिरि परियोजना का जब ग्राउंड जीरो पर जाकर आंखों देखा हाल जाना तो सच्चाई र्चौंकाने वाली थी।

माईपुल प्लांट से दी जाने वाली पीने के पानी की सप्लाई में प्रगतिनगर-गुम्मा, हुली और छैला कस्बे से ही गंदगी मिलनी शुरू हो जाती है। आगे सैंज और लेलुपुल कस्बों के भी यही हाल हैं।

यहां अधिकांश भवनों की गंदगी और गंदा पानी इसी में मिल रहा है। माईपुल में इस नदी के पानी को लिफ्ट करके शिमला पहुंचाया जा रहा है। शिमला के अलावा यहीं से ठियोग बाजार के लिए भी पानी सप्लाई होती है।

प्लांट पर बंद पड़ा है पानी साफ करने वाला ट्यूब सेटलर

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माईपुल वाटर प्लांट पर पहुंचने पर पता चला कि पानी को साफ करने वाला ट्यूब सेटलर पिछले तीन महीने से बंद पड़ा है। इसमें इकट्ठी हुई गाद साफ नजर आती है। विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि बरसात के समय में मटमैले पानी को साफ करने के लिए ही इसे चलाया जाता है।

सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग शिमला जोन के मुख्य अभियंता आरएम मुकुल का कहना है कि गिरि परियोजना के पानी के दूषित होने का अगर कोई ऐसा मामला है तो इसकी जांच की जाएगी। छानबीन के लिए संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजा जाएगा।

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को आईपीएच की क्लीन चिट

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वहीं, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग अब सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार को बचाने की कोशिश कर रहा है। महकमे का दावा है कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से अश्वनी खड्ड का पानी दूषित नहीं हुआ है। सेप्टिक टैंकों से नालों में बहाई जा रही सीवर अश्वनी खड्ड के दूषित होने का कारण है।

विभाग मान रहा है कि मल्याणा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की मशीनें खराब हैं लेकिन साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि प्लांट में सीवर ट्रीटमेंट का काम सही चल रहा है। अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए आईपीएच राजधानी में पीलिया फैलने के लिए शहर के लोगों को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण में आईपीएच की घोर लापरवाही उजागर होने के बावजूद महकमा अपनी गलती स्वीकारने को तैयार नहीं है।

आईपीएच के अफसरों का कहना है कि शहर में लोगों ने अपने घरों में सेप्टिक टैंक बना रखे हैं। टैंक भरने पर लोग सीवर खुले नालों में बहा देते हैं। नालों से बह कर गंदगी अश्वनी खड्ड तक पहुंच रही है, जिससे पानी दूषित हो रहा है। प्रवासी मजदूरों द्वारा खुले में शौच करने से भी अश्वनी खड्ड का पानी दूषित हो रहा है।

एसटीपी से दूषित नहीं हुआ अश्वनी का पानी
अश्वनी खड्ड का पानी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से दूषित नहीं हुआ। सेप्टिक टैंकों से नालों में बहाई जा रही गंदगी पानी को दूषित कर रही है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की कुछ मशीनें खराब हैं लेकिन क्षमता के अनुसार प्लांट सही काम कर रहा है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पृष्ट हो पाएगी।- आरएम मुकुल, चीफ इंजीनियर, आईपीएच

आखिर कौन सी लॉबी बचा रही ठेकेदार को?

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सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार अक्षय डोगर एफआईआर दर्ज होने के 23 दिन बाद भी एसआईटी के हत्थे नहीं चढ़ा है। जनता सवाल उठ रही है कि आखिर कौन इस ठेकेदार को बचा रहा है। एक कारोबारी को पकड़ने में पुलिस को इतना समय क्यों लग रहा है? जबकि ठेकेदार के परिवार के सभी सदस्य शिमला में ही हैं। बावजूद इसके आज तक उसका कोई सुराग नहीं लग पाया है।

हालांकि आरोपी ठेकेदार की अग्रिम जमानत याचिका पर प्रदेश उच्च न्यायालय में शुक्रवार को फैसला होगा। ऐसे में अगर आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो जाती है तो आरोपी ठेकेदार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर सकता है। इस मामले में अब तक पुलिस ने जेई प्रणीत कुमार और सुपरवाइजर मनोज वर्मा को गिरफ्तार किया है। इन्हें वीरवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

उधर, ठेकेदार भी अग्रिम जमानत के लिए छटपटा रहा है। वीरवार को प्रदेश उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगा रखी थी। इसकी याचिका पर शुक्रवार को फैसला होगा? क्या शुक्रवार को आरोपी ठेकेदार अदालत में पहुंचेगा, इस पर भी संशय बना हुआ है। आरोपी ठेकेदार की गिरफ्तारी न होने की वजह से पुलिस की जांच भी अधर में लटकी है। पुलिस का दावा है कि कई बार उसे पकड़ने के लिए संभावित जगहों पर दबिश दी गई, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला।

पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी राज्य से बाहर है और ऐसा कोई साक्ष्य शातिर ठेकेदार ने नहीं छोड़ा है, जिससे पुलिस उस तक पहुंच पाए। हालांकि पुलिस का यह भी मानना है कि आखिर कब तक वह भागता रहेगा, उसे जल्द ही आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर देंगे।

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