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भाजपा हिमाचल में भी अपनाएगी यूपी-उत्तराखंड का सफल फार्मूला

Mon, 31 Jul 2017 02:40 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 31 Jul 2017 02:40 PM IST
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BJP will not declared cm candidate in himachal for vidhan sabha elections

विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश कार्यसमिति की आखिरी बैठक में यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि पार्टी उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सफल फार्मूले को हिमाचल में इस्तेमाल करेगी। मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के मूड में पार्टी नहीं दिख रही है। सीएम का नाम घोषित होने से मोदी लहर प्रभावित हो सकती है।

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पार्टी के रणनीतिकार हर हाल में चुनाव मोदी बनाम वीरभद्र करने की तैयारी में है। राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल ने संकेत दिए हैं कि उत्तरप्रदेश में सपा-बसपा और गुजरात में कांग्रेस के विधायकों की हुई टूट हिमाचल में भी संभव है। बैठक में कुछ कांग्रेसी मंत्रियों-विधायकों के संपर्क में होने की बात सामने आई।
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महामंत्री की जिताऊ प्रत्याशी की थ्योरी से साफ हुआ है कि भाजपा में बड़े नामों को टिकट मिलना भी आसान नहीं। पार्टी हर विधानसभा हलके का सर्वे करवा रही है। दूसरे दलों से नेताओं की भाजपा में आमद पर बगावत के सुर को थामने के लिए अभी से कार्यकर्ताओं को मानसिक तौर पर तैयार किया जा रहा है।
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कुल मिलाकर कार्यसमिति में तीन दिन हुए मंथन के दौरान मिशन 50 प्लस को साकार करने के लिए सीएम चेहरा, कांग्रेस में तोड़फोड़ और चुनाव को केंद्र बनाम राज्य बनाने के लिए सांसदों, विधायकों, प्रदेश संगठन और मोर्चों के पदाधिकारियों को चुनावी मंत्र दिया गया।

एक नहीं, कम से कम तीन दावेदारों का पैनल बनाएं
टिकट की दावेदारी को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। प्रदेश नेतृत्व को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वर्तमान विधायक की सीट पर भी कम से कम तीन प्रत्याशियों के पैनल को आगे बढ़ाएं। एक नाम वाले प्रस्तावों पर नेतृत्व गौर ही नहीं करेगा। इसके साथ ही टिकट पाने की कतार में लगे दावेदारों को पार्टी ने एक श्रेणी में ला दिया है।

नेताओं के पुराने सियासी रिकार्डों की जगह उनके ताजा जनाधार को आधार बनाया जाएगा। नए दावेदारों को यह मंत्र दिया गया है कि 31 अगस्त तक पार्टी में नए लोगों की ज्वाइनिंग करवाने का डाटा भी उनके पर्सनल डोजियर का हिस्सा बनेगा। पार्टी के घोषित कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता के साथ सर्वे में उनकी बूथ स्तर पर पकड़ को टिकट का आधार बनाया जाएगा।

हर टूट से आप होते हैं खुश.. 
रामलाल ने कांग्रेस सहित अन्य दलों में भाजपा की सेंधमारी को अपने तरीके से परिभाषित किया। उन्होंने पदाधिकारियों से पूछा कि नगर निगम शिमला में जब दूसरे दलों के पार्षदों से निगम कब्जाया तो कैसा लगा। सभी ने कहा कि अच्छा लगा। फिर महामंत्री ने कहा कि गुजरात में 5 कांग्रेस विधायक भाजपा में आए तो कैसा लगा? 


सभी गदगद दिखे। यूपी में बसपा और सपा के एमएलसी भाजपा में आने की बात भी सवालिया अंदाज में रामलाल ने कही। इसके बाद उन्होंने कहा कि हिमाचल में भी ऐसा होगा, लेकिन कार्यकर्ता यह न समझें कि उनकी प्राथमिकता कम हो जाएगी।

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