'वीरभद्र की उल्टी गिनती शुरू, कभी भी गिर सकती है सरकार'
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भाजपा के ‘वीरभद्र हटाओ हिमाचल बचाओ’ अभियान के तहत बुधवार को जोरावर स्टेडियम में आयोजित होने वाली रैली में हिस्सा लेने पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय सचिव एवं हिमाचल प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने धर्मशाला पहुंचते ही मुख्यमंत्री पर आरोपों की झड़ी लगा दी। मीडिया से रूबरू होकर श्रीकांत ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
प्रदेश से कांग्रेस सरकार का जाना अब तय है। मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त हैं। अपने बाद वीरभद्र किसी और को मौका नहीं देना चाहते। ऐसे में उनकी सरकार कभी भी जा सकती है। श्रीकांत ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी पूछा कि आखिरकर वीरभद्र सिंह से क्या डील की है। उन्हें सीएम पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा।
श्रीकांत ने कहा कि दो दिसंबर को जोरावर स्टेडियम में भाजपा की रैली के दौरान सीएम वीरभद्र का मुद्दा उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री पर सीबीआई और ईडी ने केस दर्ज किया है। ऐसे में मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। रैली में केंद्रीय मंत्री नड्डा के आने की भी श्रीकांत ने पुष्टि की है। श्रीकांत ने कहा कि कांग्रेस असहिष्णुता पर बात करती है। असहिष्णुता तो कांग्रेस में है। केंद्र सरकार ने हिमाचल को उसका हर हक दिया है।
मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा दें : शांता
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद शांता कुमार ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा कि आरोपों की वजह से मुख्यमंत्री को नैतिकता और कानून का सम्मान करते हुए पद छोड़ देना चाहिए। अस्वस्थ होने की वजह से शांता कुमार ने कहा कि वे बुधवार को तपोवन के साथ जोरावर स्टेडियम में होने वाली भाजपा रैली में शामिल नहीं हो पाएंगे।
शांता ने कहा कि प्रदेश में राजनीतिक परिस्थितियां चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बन गई हैं। सीएम गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। कांग्रेस के कई प्रमुख नेता पार्टी में उत्तरदायित्व की दौड़ में लगे हैं। शासन और प्रशासन ठप है। विकास के काम रुक गए हैं। हिमाचल केंद्र की सभी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है। कांग्रेस हाईकमान भी इस दिशा में कुछ नहीं कर रहा है।
उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने लंबे समय से प्रदेश में काम किया है। वह अब इस प्रकार प्रदेश के विकास में बाधक न बनें और खुद ही पद छोड़ दें। पिछले दो वर्षों से जब से कांग्रेस सरकार सत्ता में आई है, प्रदेश की राजनीति टकराव में है। कोई रचनात्मक कार्य नहीं हो रहा है।