भाजपा का हिमाचल विस चुनाव प्रचार का पहला चरण तय, ये कार्यक्रम होंगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दो दिवसीय पालमपुर प्रवास में विधानसभा चुनाव प्रचार का पहला चरण तय कर दिया गया है। कांग्रेस पर हमलावर होने से अधिक भाजपा पीएम मोदी के सुशासन के सहारे सियासी दंगल में उतरेगी। ‘मोदी मॉडल’ को हिट करने के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में पदयात्रा होगी।
पदयात्राओं के बाद चारों संसदीय क्षेत्रों में चार परिवर्तन रथ दौड़ाए जाएंगे। इन हाईटेक रथों से केंद्र की नोटबंदी, उज्जवला, स्टार्ट अप, ओआरओपी, जनधन जैसी उपलब्धियों को लोगों के बीच ले जाया जाएगा। केंद्र से मिली फंडिंग को आगे रखकर सीएम वीरभद्र की छवि पर भाजपा निशाना साधेगी। दो दिन चले मंथन में यह भी साफ कर दिया गया है कि सीएम चेहरे पर फिलहाल कोई बात नहीं होगी। समय आने पर केंद्रीय नेतृत्व इस पर निर्णय लेगा।
पीएम मोदी के चेहरे को आगे रखकर होगा प्रचार
शाह की कोर ग्रुप, संघ, सात प्रमुख मोर्चों, विधायकों और सांसदों के साथ हुई बैठकों में चुनावी माहौल बनाने के लिए प्रचार का पहला चरण लांच करने पर मंथन हुआ। शाह ने साफ कर दिया कि सीएम चेहरे पर पार्टी ने अभी निर्णय नहीं लिया है। पीएम मोदी के चेहरे और उपलब्धियों को आगे रखकर ही उन्होंने प्रचार का खाका तय किया।
प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती को जिला और विधानसभा स्तर पर पूर्णकालिक प्रभारी तैनात करने के साथ बूथों को सुदृढ़ करना है। प्रभारी तय करने के बाद विधानसभा क्षेत्रों में केंद्र की उपलब्धियों और राज्य सरकार की नाकामियों को लेकर विधायक, पूर्व विधायक, दावेदार और पदाधिकारी अपने अपने स्तर से पदयात्राएं निकालेंगे। जून से पदयात्रा अभियान शुरू हो सकता है।
इसके बाद पार्टी परिवर्तन रथ अभियान चलाएगी। मंथन में अभी चार संसदीय क्षेत्रों के लिए चार रथ अलग-अलग संचालित करने पर सहमति बनी है। सांसद शांता कुमार, विरेंद्र कश्यप, रामस्वरूप शर्मा और अनुराग ठाकुर की अभियान में अहम भूमिका रहेगी।
जुलाई अंत में होने वाली रथों की लांचिंग पर शाह भी पहुंच सकते हैं। प्रचार अभियान पर पूरी तरह केंद्रीय नेतृत्व की नजर रहेगी, जिससे साफ है कि प्रदेश संगठन के हिस्से केंद्रीय नेताओं की जनसभाओं और रैलियों में भीड़ जुटाने भर का काम ही रहेगा।
गुटबाजी पर शाह सख्त
प्रदेश भाजपा पर गुटबाजी के आरोपों पर शाह सख्त दिखे। शाह ने अलग-अलग बैठकों में साफ कर दिया कि पार्टी को एकजुट होकर चुनाव लड़ना है। किसी स्थानीय नेता के चेहरे को आगे नहीं किया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्रियों, सांसदों और विधायकों सहित संगठन पदाधिकारियों की प्रचार में भूमिका तय होगी।
पार्टी चेहरा देने के जोखिम से इसलिए भी बच रही है कि उससे गुटबाजी को हवा मिल सकती है। हालांकि, प्रचार अभियान रणनीति में कोर ग्रुप के साथ जेपी नड्डा अहम रहेंगे। ऐसे में अब तक रही शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल की सरकारों की उपलब्धियां भी चुनाव प्रचार में कम ही सुनाई देंगी।
ग्राउंड पर दम दिखाओ, फिर टिकट के लिए आओ
शाह ने चुनाव में टिकट के दावेदारों को साफ कर दिया है कि पहले विधानसभा क्षेत्रों में जाकर प्रचार अभियान को तेज करो। पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र के दावेदारों की कार्यशैली की नियमित रिपोर्टिंग का तंत्र भी विकसित करेगी।
बैठक में साफ किया गया कि पार्टी नेताओं के पुराने रिकॉर्ड को टिकट का आधार तभी बनाएगी जब उसकी मौजूदा रिपोर्ट जिताऊ प्रत्याशी की होगी। इससे कई सिटिंग विधायकों को झटका लगने के संकेत भी दे दिए हैं।
केंद्र बनाम राज्य होगा मुकाबला
केंद्रीय भाजपा लीडरशिप सोची समझी रणनीति के तहत केवल सीएम वीरभद्र को टारगेट करेगी। पार्टी रणनीतिक लिहाज से चुनाव केंद्र सरकार बनाम मौजूदा राज्य सरकार करना चाहती है। केंद्र से हिमाचल को मिली केंद्र पोषित योजनाओं से लेकर 14वें वित्त आयोग
में किए 28 हजार करोड़ के प्रावधान और केंद्रीय कर में 6 गुना हिस्सेदारी बढ़ाकर 40 हजार करोड़ करने के मुद्दों को भुनाया जाना है। ऐसा करने से पार्टी की पूर्ववर्ती सरकारों पर लगने वाले आरोप भी प्रचार से गायब हो जाएंगे।