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Shimla News: अनुबंध सेवा के विधेयक के समर्थन में उतरा हपुटा
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भर्ती में फर्जीबाड़ा रुकने का किया दावा
जनता पर आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा : संघ
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश शिक्षक संघ (हपुटा) ने प्रदेश सरकार के पारित अनुबंध सेवाओं संबंधित विधेयक का समर्थन किया है। संघ के अध्यक्ष डाॅ. एमएस ठाकुर और सचिव डाॅ. वाई हारटा, सह सचिव डाॅ. विनय शर्मा, कोषाध्यक्ष डाॅ. अंजना ठाकुर ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारी की अनैतिक रूप से पूर्व में प्रदान की गई सेवाओं के अधिग्रहण का फर्जीबाड़ा रुकेगा। विधेयक के लागू होने से आम जनता के ऊपर पड़ने वाला आर्थिक बोझ रोका जा सकेगा। हपुटा पदाधिकारियों ने कहा कि कुछ लोग इस विषय के ऊपर निजी स्वार्थों के लिए राजनीति कर रहे हैं।
विधानसभा में इस विधेयक को पक्ष एवं विपक्ष द्वारा बिना किसी विरोध के ध्वनिमत से पारित किया जा चुका है। उन्होंने मांग की कि इस विधेयक को पूर्ण तौर पर सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में लागू किया जाए। मांग की कि सरकार यूजीसी द्वारा 2016 से लागू सातवें वेतनमान को पूर्ण रूप से लागू करें। इसमें जिन शिक्षकों की कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत पदोन्नति देय है उनको भी जल्द लागू किया जाए। शिक्षा सचिव द्वारा इस संबंध में जारी अधिसूचना को वापस लिया जाए। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के एरियर की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 साल से बढ़ाकर 65 साल करने की मांग उठाई गई।
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जनता पर आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा : संघ
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश शिक्षक संघ (हपुटा) ने प्रदेश सरकार के पारित अनुबंध सेवाओं संबंधित विधेयक का समर्थन किया है। संघ के अध्यक्ष डाॅ. एमएस ठाकुर और सचिव डाॅ. वाई हारटा, सह सचिव डाॅ. विनय शर्मा, कोषाध्यक्ष डाॅ. अंजना ठाकुर ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारी की अनैतिक रूप से पूर्व में प्रदान की गई सेवाओं के अधिग्रहण का फर्जीबाड़ा रुकेगा। विधेयक के लागू होने से आम जनता के ऊपर पड़ने वाला आर्थिक बोझ रोका जा सकेगा। हपुटा पदाधिकारियों ने कहा कि कुछ लोग इस विषय के ऊपर निजी स्वार्थों के लिए राजनीति कर रहे हैं।
विधानसभा में इस विधेयक को पक्ष एवं विपक्ष द्वारा बिना किसी विरोध के ध्वनिमत से पारित किया जा चुका है। उन्होंने मांग की कि इस विधेयक को पूर्ण तौर पर सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में लागू किया जाए। मांग की कि सरकार यूजीसी द्वारा 2016 से लागू सातवें वेतनमान को पूर्ण रूप से लागू करें। इसमें जिन शिक्षकों की कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत पदोन्नति देय है उनको भी जल्द लागू किया जाए। शिक्षा सचिव द्वारा इस संबंध में जारी अधिसूचना को वापस लिया जाए। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के एरियर की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 साल से बढ़ाकर 65 साल करने की मांग उठाई गई।
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