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इस जिले के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल आकाशवाणी पर होंगे प्रसारित
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 01 Aug 2017 11:55 AM IST
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आकाशवाणी शिमला बिलासपुर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के रूपकों की शृंखला का प्रसारण करेगा। यह प्रसारण एक से 13 सितंबर तक रात साढ़े नौ बजे होगा। हर एक रूपक को रेडियो पर आधा घंटा तक प्रसारित किया जाएगा। इन रूपकों को साहित्यकार कुलदीप चंदेल द्वारा लिखा गया है।
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प्रसारित किए जाने वाले ऐतिहासिक रूपकों में किला कोटकहलूर, बच्छरेटू, बसेह, त्यून सरयून, छंजयार, बहादुरपुर, फतेहपुर, रत्नपुर शामिल हैं। धार्मिक स्थलों पर लिखे गए रूपकों में हिंदु सिखों के साझे तीर्थ स्थल श्री नयनादेवी, श्री नाहर सिंह मंदिर, व्यास गुफा, श्री मार्कंडेय तीर्थ तथा हिंदू मुसलमानों का साझा पूजा स्थल लखदाता पीर रयाणू मंदिर है।
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कुलदीप चंदेल ने बताया कि कहलूर रियासत का इतिहास बहुत रोचक है। उतना ही रोमांचकारी इस बारे में जानकारी जुटाना है। किला कोट कहलूर में जब दिल्ली के बादशाह मोहम्मद तुगलक की मुस्लिम सेना के सरदार तातर खान ने घेराबंदी की थी और किले का मुख्य द्वार तोड़ने के लिए एक हाथी को लाया गया था। कहलूर की सेना को सब तरफ से घेर लिया गया था।
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तब उस समय कहलूर नरेश अभयसारचंद ने वीरता का परिचय देते हुए हाथी की सूंड को अपनी तलवार से काट कर तातर खान को भी मार गिराया था। इसी तरह मोहम्मद गौरी ने सन 1191 ई. में पंजाब के सरहिंद तक का क्षेत्र जीत लिया था। तब कहलूर के राजा पृथ्वीचंद ने राज्य की सुरक्षा के लिए सिरयून के किले का निर्माण करवाया था। जनश्रुतियों में बिलासपुर के धार्मिक स्थलों के बारे में भी कई सुरुचिपूर्ण तथा ज्ञानवर्धक बातों का पता चलता है।