बड़ा फर्जीवाड़ा, कागजों में काम दिखाकर प्रधानों ने हड़पे करोड़ों रुपए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल की पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी हो रही है। कई जगह जमीन पर काम हुआ ही नहीं और कागजों में लाखों का खर्च दिखा दिए गए करोड़ों रुपये। कई क्षेत्रों में विकास कार्यों के नाम पर लीपापोती ही की गई।
पंचायतों के पिछले कार्यकाल के दौरान प्रदेश भर में करीब 100 ऐसे पंचायत प्रधानों-उपप्रधानों के मामले सामने आए हैं। इन जन प्रतिनिधियों ने विकास कार्यों में लगभग 8 करोड़ की हेराफेरी की है। जांच में गड़बड़ी पाए जाने के बाद पंचायती राज विभाग ने अब इनके खिलाफ रिकवरी नोटिस जारी कर दिए हैं।
पैसा जमा न करवाने की सूरत में इनकी संपत्ति भी कुर्क हो सकती है। पंचायती राज विभाग के पास 9 जिलों से गड़बड़ी करने वाले पूर्व पंचायत प्रधानों, उप प्रधानों की रिपोर्ट पहुंच गई है। तीन जिलों शिमला, कांगड़ा एवं मंडी को रिपोर्ट के लिए रिमाइंडर भेजा है। सूत्रों का कहना है कि गड़बड़ी के ज्यादातर मामले आरटीआई के तहत सूचना मिलने पर सामने आए हैं।
इन विकास कार्यों के लिए जारी होता है पैसा
पंचायतों में वर्षा शालिका, सड़कों और रास्तों के निर्माण, पेयजल टैंक, कूहलें, सिंचाई स्कीमें, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, सभागार आदि के निर्माण के लिए पैसा जारी होता है।
पिछले कार्यकाल के डिफाल्टर प्रधान और उपप्रधानों को रिकवरी के आदेश जारी कर दिए हैं। 9 जिलों से प्रधानों की रिपोर्ट मिली है, जबकि तीन जिलों को रिपोर्ट देने का रिमाइंडर भेजा है। पैसा जमा न करने पर भू-राजस्व अधिनियम के तहत जमीन की कुर्की भी हो सकती है।- राकेश कोलरा, ज्वाइंट डायरेक्टर कम डिप्टी सेक्रेटरी पंचायती राज विभाग