प्रशासन की अनोखी मुहिम, अब बेटियों को बचाएगी फोन कॉल
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देश भर में शिशु लिंगानुपात को लेकर चिंताजनक आंकड़े तक पहुंचे ऊना जिला में अब बेटियों की बढ़ोतरी के लिए जिला प्रशासन की अनूठी योजनाएं असर दिखाने लगी हैं। अगर आप मौजूदा दौर में ऊना जिला के किसी सरकारी अधिकारी के मोबाइल पर कॉल करें तो आपको सुरीली आवाज में एक ऐसी कॉलर ट्यून सुनने को मिलेगी, जिसमें बेटियां पढ़ाने और बेटियां को बचाने का संदेश है।
आज से यह कॉलर टयून अधिकारियों के मोबाइल पर बजना शुरू हो गई है और एक-दो दिन में मीडिया कर्मियों के मोबाइल पर भी यह बजने लगेगी। जिला में गुड्डा-गुड्डी बोर्ड योजना के अलावा टास्क फोर्स के गठन के बाद अब नवनियुक्त डीसी विकास लाबरू ने कार्यभार संभालने के बाद यह कालर ट्यून तैयार करवाने की परिकल्पना की थी।
इसका गीत डीपीआरओ और साहित्यकार गुरमीत बेदी ने लिखा और भटोली कॉलेज की बीए प्रथम सेमेस्टर की छात्रा कंचन शर्मा ने इसे अपना मधुर स्वर दिया है। कंचन शर्मा ने हाल ही में इंटर कॉलेज यूथ फेस्टिवल में गजल गायन में प्रथम स्थान हासिल किया है और वह जाने माने संगीतज्ञ प्रो.आहुजा के मार्गदर्शन में संगीत की तालीम ले रही हैं।
कई ऑडिशन के बाद कंचन की आवाज पर मुहर
ये हैं गीत के बोल- इस गीत के बोल हैं आओ बेटियां बचाएं-आओ बेटियां पढ़ाएं, सांसें अगर संगीत हैं तो सरगम हैं बेटियां, जीवन के इस सफर में मरहम हैं बेटियां, आन बेटियां, शान बेटियां, इस धरा पर ईश्वर का वरदान बेटियां, आपकी बेटियां, हमारी बेटियां, हम सबकी बेटियां, ये प्यारी बेटियां....।
डीसी विकास लाबरू ने इस कॉलर ट्यून को तैयार करवाने के लिए जिला के कई स्वर साधकों और संगीत प्रेमियों से संपर्क किया और वे अपने आवास में भी उन्हें बुलाकर लगातार कई दिन तक इसे अंतिम रूप देने में लगे रहे। अंतत: भटोली कॉलेज की छात्रा कंचन शर्मा की सुरीली आवाज का इस कॉलर ट्यून के लिए उन्होंने चयन किया।
उन्होंने बताया जिला में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान लगातार गति पकड़ रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी नुक्कड़ नाटकों, समूहवार्ताओं, जागरूकता शिविरों और ग्राम सभाओं की बैठकों के माध्यम से भी लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कॉलर ट्यून भी इस संदेश को जन-जन तक ले जाने में सहायक बनेगी।
875 से 900 तक पहुंचा आंकड़ा
ऊना में एक समय ऐसा आया जब केंद्र सरकार के सर्वेक्षण में ऊना जिला में लिंगानुपात प्रतिम 1000 लड़कों के पीछे 875 तक लुढ़क गया। ऊना को 100 संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया। जिसके बाद यहां बेटियों को बचाने के लिए एक मुहिम शुरू की गई। उस
मुहिम का नतीजा यह रहा कि शिशु लिंगानुपात में 25 प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 900 तक जा पहुंचा। लेकिन अभी भी जिला में लिंगानुपात को संवेदनशील माना जा रहा है। डीसी विकास लाबरू का कहना है कि यह अभियान जारी रहेगा और अगली जनगणना तक हम एक सम्मानजनक आंकड़े पर होंगे।