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Shimla: लोन फर्जीवाड़े में लाभार्थी और सहयोगी दोषी करार, जिला अदालत ने सुनाया फैसला

Sat, 26 Nov 2022 10:45 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 26 Nov 2022 10:45 AM IST
सार

पंजाब नेशनल बैंक में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन लेने के मामले लाभार्थी पुरखू राम और ताशी फुंचोग को दोषी करार दिया है। अब 28 नवंबर को दोषियों को सजा सुनाई जाएगी। 

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Beneficiary and accomplice convicted in loan forgery, district court shimla pronounces verdict
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिला अदालत शिमला ने पंजाब नेशनल बैंक में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन लेने के मामले लाभार्थी पुरखू राम और ताशी फुंचोग को दोषी करार दिया है। अब 28 नवंबर को दोषियों को सजा सुनाई जाएगी। विशेष न्यायाधीश अमन सूद ने सीबीआई के अभियोग का निपटारा करते हुए यह निर्णय सुनाया। सीबीआई की ओर से चार नामित आरोपियों में से अदालत ने दो को दोषमुक्त कर दिया है। कुल्लू जिले की पीएनबी शाखा सुलतानपुर में 1.12 करोड़ रुपये के फर्जी लोन घोटाले में सीबीआई ने चार आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाया था। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया था।

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जांच एजेंसी ने 26 किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन की अलग-अलग जांच की और पाया कि बैंक कर्मचारियों की मदद से 1.12 करोड़ रुपये की चपत लगाई गई। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों के आधार पर अदालत ने पाया कि आरोपी पुरखू राम ने फर्जी जमाबंदी के आधार पर 3.26 लाख रुपये का केसीसी लोन बनवाया था। इस जमाबंदी में आरोपी के नाम 12 बीघे जमीन दर्शायी गई थी। जांच में पाया गया था कि इस जमीन का भार मुक्त प्रमाणपत्र बैंक के वकील ने दिया था। लोन केस को बैंक के अधिकारियों ने स्वीकृत किया और 29 अप्रैल 2011 को सारा पैसा आरोपी के खाते में एकमुश्त जमा किया गया। जांच एजेंसी ने सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में सबूत पेश किए। अदालत ने सबूतों के आधार पर पाया कि सीबीआई आरोपियों के खिलाफ जुर्म साबित करने में सफल रही है।  

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जलवाहक को हाईकोर्ट ने दिया पदोन्नति का लाभ 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जलवाहक को पदोन्नती का लाभ दिया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि याचिकाकर्ता को सभी सेवा लाभ के साथ लैब तकनीशियन के पद पर पदोन्नत किया जाए। 
याचिकाकर्ता को वर्ष 2001 से जलवाहक के पद पर तैनात किया गया था। 15 वर्षों के बाद उसे चापरासी के पद पर नियमित किया गया। वर्ष 2018 में उसने मुक्त विद्यालय से दसवीं की परीक्षा पास की और वह लैब तकनीशियन के पद पर पदोन्नत होने के लिए योग्य हो गई। शिक्षा विभाग ने उसका आवेदन यह कहकर खारिज कर दिया था कि उसने मुक्त विद्यालय से दसवीं की परीक्षा पास की है। 

शिक्षा बोर्ड ने इस विद्यालय की संबद्धता रद्द कर दी थी। अदालत ने पाया कि शिक्षा बोर्ड ने पहली दिसंबर 2017 और 5 फरवरी 2019 की बीच के अभ्यर्थियों को ही संबद्धता दी थी। मामले से जुडे़ रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि शिक्षा विभाग ने गलत तरीके से याचिकाकर्ता को पदोन्नति के लाभ से वंचित रखा है। जबकि उसने शिक्षा बोर्ड के निर्देशों के हिसाब से ही संबद्धता अवधि में ही दसवीं पास की है। अदालत ने शिक्षा विभाग के निर्णय को गलत ठहराते हुए याचिकाकर्ता को पदोन्नति का लाभ देने के आदेश दिए हैं। 

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