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Shimla News: ठंड से सुस्त पड़ीं मधुमक्खियां, परागण प्रभावित होने की आशंका

Thu, 19 Mar 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:59 PM IST
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Bees are sluggish due to cold, pollination is likely to be affected
सेब के बगीचों में परागण के लिए बागवानों ने रखे हैं मधुमक्खियों के बक्शे, बारिश के बाद बाहर निकल रही हैं कम
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उद्यान विभाग ने दी हैंड पॉलिनेशन करने की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश में लगातार बारिश, कम तापमान और बादल छाए रहने से सेब के बगीचों में परागण के लिए मधुमक्खियों की सक्रियता कम होती जा रही है। इसकी वजह से बागवानों की परेशानियां बढ़ गईं हैं। उद्यान विभाग ने बागवानों को फल सेट सुनिश्चित करने के लिए हैंड पॉलिनेशन की सलाह दी है।

हिमाचल प्रदेश के विभिन्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की फसल इस समय फूल अवस्था (ब्लूमिंग स्टेज) में प्रवेश कर रही है जो संपूर्ण उत्पादन चक्र का अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक चरण माना जाता है। इस अवधि में परागण, फल सेट होना और प्रारंभिक फल विकास की प्रक्रियाएं होती हैं जो आगे चलकर उत्पादन, फल के आकार, गुणवत्ता तथा बाजार मूल्य को सीधे प्रभावित करती हैं। इस स्थिति में उद्यान विभाग की ओर से बागवानों को फल सेट सुनिश्चित करने के लिए हैंड पॉलिनेशन (हस्त परागण) तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है जो वैज्ञानिक रूप से सिद्ध एवं प्रभावी उपाय है। परागण के लिए बागवान ब्रश, कॉटन स्वैब और विशेष पोलन एप्लीकेटर का उपयोग कर सकते हैं। बड़े बगीचों में पराग को टेल्क पाउडर (1:10 अनुपात) के साथ मिलाकर डस्टर तथा ब्लोअर की सहायता से भी समान रूप से फैलाया जा सकता है। बेहतर परिणामों के लिए 1 से 2 बार दोहराव भी किया जा सकता है। इस अवधि में बागवान अनावश्यक कीटनाशकों का प्रयोग न करें ताकि मधुमक्खियों और अन्य परागण कीटों की गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके अलावा सिंचाई, पोषण और रोग-कीट प्रबंधन भी वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही किया जाए।
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उद्यान विभाग के निदेशक डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि हस्त परागण के साथ प्राकृतिक परागण को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए बगीचों में पर्याप्त संख्या में मधुमक्खी के बक्सों की स्थापना की जानी चाहिए। सामान्य 5 से 8 मधुमक्खी के बक्से प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होते हैं। बागवान अपनी आवश्यकता अनुसार मधुमक्खी बक्से बागवानी विभाग के मधुमक्खी पालन अधिकारियों से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने सभी बागवानों से अपील की है कि वह आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर सेब उत्पादन को बढ़ाएं और किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण तथा सहायता के लिए अपने नजदीकी बागवानी विकास अधिकारी से संपर्क करें। हस्त परागण के लिए उपयुक्त एवं संगत परागण किस्मों का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए गोल्डन डिलीशियस, रेड गोल्डन, ग्रेनी स्मिथ, चैलेंजर, स्नोड्रिफ्ट और मंचूरियन सहित किस्मों का प्रयोग किया जा सकता है जिनका फूलने का समय मुख्य किस्मों के साथ मेल खाता है।
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ऐसे करें हैंड पॉलिनेशन
हस्त पराग संग्रहण (हैंड पॉलिनेशन) के लिए फूल के पूर्ण रूप से खुलने से ठीक पहले सुबह के समय करना चाहिए। इसके बाद फूलों से परागकोष अलग कर उन्हें स्वच्छ एवं छायादार स्थान पर 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 24 से 48 घंटे तक सुखाया जाता है जिससे पराग खुद निकल आता है। पराग को छानकर साफ किया जाता है और आवश्यकता अनुसार ठंडे तथा शुष्क स्थान (रेफ्रिजरेटर) में सुरक्षित रखा जा सकता है। हस्त परागण का कार्य पूर्ण पुष्प अवस्था में किया जाना चाहिए जब फूल का वर्तिकाग्र, चिपचिपा और पराग ग्रहण करने के लिए उपयुक्त होता है। इस कार्य के लिए सुबह 10 से दोपहर 3 बजे के बीच का समय सर्वोत्तम रहता है जब मौसम शुष्क तथा अनुकूल हो।
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