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स्कूल में मरे मिले सैकड़ों चमगादड़, निपाह वायरस की आशंका से फैली दहशत

Thu, 24 May 2018 11:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नाहन (सिरमौर)
अमर उजाला ब्यूरो, नाहन (सिरमौर) Updated Thu, 24 May 2018 11:07 AM IST
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bats found dead in school suspense over  Nipah virus

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के सीनियर सेकेंडरी स्कूल बर्मा पापड़ी में सैकड़ों चमगादड़ों के मृत मिलने से हड़कंप मच गया। निपाह वायरस की आशंका से स्कूल समेत आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। स्कूल प्रशासन ने तत्काल प्रशासन को सूचित किया, जिसके बाद मौके पर आई संयुक्त टीम ने मरे चमगादड़ों के सैंपल लेने के बाद उन्हें गड्ढे में जला दिया।

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सैंपल को जांच के लिए जालंधर और पुणे स्थित लैब में भेजने की तैयारी की जा रही है। एहतियात के तौर पर स्कूली बच्चों और स्टाफ सदस्यों को मृत पक्षी अथवा पशु से दूर रहने की हिदायत दी है। केरल में निपाह वायरस से मौतों की सूचना के बाद पूरे हिमाचल में सावधानी बरतने की हिदायतें जारी की गई हैं। इसी बीच बुधवार को सिरमौर जिले के बर्मा पापड़ी में एक साथ सैकड़ों चमगादड़ों की मौत से दहशत का माहौल बन गया।
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बुधवार को स्कूल में कई चमगादड़ सफेदे के पेड़ों पर मृत अवस्था में दिखाई दिए। वहीं, स्कूल मैदान में भी चमगादड़ों के ढेर लग गए। स्कूल प्रधानाचार्य स्पर्णा भारद्वाज ने बताया कि चमगादड़ों के मरने की घटना से तत्काल प्रशासन को अवगत करा दिया गया। उन्होंने बताया कि स्कूल परिसर में सफेदे के पेड़ हैं। जिन पर अक्सर चमगादड़ों का बसेरा रहता है।

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कैसे मरे एकसाथ इतने चमगादड़

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उधर, उपायुक्त सिरमौर ललित जैन ने मामला ध्यान में आते ही सहायक आयुक्त एसएस राठौर की अगुवाई में एक टीम मौके पर भेजी। डीएफओ नाहन वेंकटेश रमन, पशुपालन विभाग के उप निदेशक नीरू शबनम, शिक्षा विभाग के उप निदेशक उमेश बहुगुणा, सीएमओ डॉ. संजय शर्मा मौके पर पहुंचे।

डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि चमगादड़ों की एक साथ मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। स्कूल के स्टाफ और बच्चों से कहा गया है कि वह मृत मिले किसी भी पक्षी अथवा पशु के पास न जाएं। यह वायरस भी फैला सकते हैं।

पशुपालन विभाग की उप निदेशक नीरू शबनम ने बताया कि मृत चमगादड़ों के सैंपल लिए गए हैं। सैंपलों को जांच के लिए नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ वायरल डिजिजिस जालंधर भेजा जाएगा। कुछ सैंपल पुणे लैब भी भेजे जा सकते हैं। इधर, स्कूल की शिक्षिका मनीषा ने बताया कि परिसर में मरे चमगादड़ों को वन विभाग की टीम ने गड्ढे खोदकर उनमें जला दिया है।

गर्मी से मरे चमगादड़: डीसी

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उपायुक्त ललित जैन ने कहा कि निपाह वायरस जैसी कोई बात नहीं है। गर्मी की वजह से चमगादड़ों की मौत हुई है। इस बारे में विशेषज्ञों से भी राय ली गई है। इस वायरस से चमगादड़ नहीं मरते, जबकि वह सिर्फ वायरस फैलाते हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर सैंपल लिए गए हैं। 

पहली बार इतनी संख्या में मृत मिले चमगादड़- स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो गांव में इतनी ज्यादा संख्या में चमगादड़ों के मरने की यह पहली घटना है। हालांकि इससे पूर्व इक्का दुक्का चमगादड़ मृत अवस्था में देखे जा चुके हैं।

निपाह वायरस से मौतों के बाद हिमाचल अलर्ट

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दक्षिण भारत में निपाह वायरस से मौत के मामले सामने आने के बाद हिमाचल अलर्ट हो गया है। देवभूमि आ रहे सैलानियों की वजह से यहां भी वायरस के पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, अभी तक ऐसे लक्षण वाला कोई भी मामला सामने नहीं आया है।

स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय ने सभी सीएमओ को निर्देश जारी कर सावधान रहने को कहा है। स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डॉ. बलदेव कुमार ने कहा कि दक्षिण भारत में निपाह वायरस के मामले सामने आने के बाद से हिमाचल अलर्ट है। अधिकारियों को रूटीन में इस बारे में बता दिया गया है कि वे अपडेट रहें।  

क्यों जानलेवा है निपाह वायरस- चिकित्सकों के अनुसार निपाह वायरस तेजी से उभर रहा है। ये जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है। इसका सबसे पहले 1998 में मलेशिया के निपाह कम्पंग सुंगाई से पता चला था। इसीलिए इसका नाम निपाह वायरस रखा गया।

तब इस बीमारी के वाहक सूअर थे। 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखने से इस वायरस की चपेट में आए। उस वक्त इस वायरस का वाहक चमगादड़ था। इसे फ्रूट बैट कहा जाता है। इसके संक्रमण से सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी हो सकती है या फिर जानलेवा इंसेफ्लाइटिस भी अपनी चपेट में ले सकता है, जिसमें दिमाग को नुकसान होता है।

इससे मरीज कोमा में भी जा सकता है। इस बीमारी को दूर करने के लिए अभी तक कोई इंजेक्शन नहीं है। 5 से 14 दिन तक इसकी चपेट में आने के बाद यह वायरस तीन से 14 दिन तक तेज बुखार और सिरदर्द की वजह बन सकता है। 

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