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सेब का आकार बढ़ाने के लिए किया जा रहा इस खतरनाक रसायन का इस्तेमाल

Mon, 11 Dec 2017 04:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 11 Dec 2017 04:54 PM IST
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 banned chemical used to increase the size of apple

प्रतिबंध लगा होने के बावजूद हिमाचल में सेब के पेड़ों और इसके फलों पर कई तरह के ग्रोथ रेगुलेटर रसायनों का इस्तेमाल हो रहा है। केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड की ओर से मंजूरी नहीं मिलने के बावजूद इनका गैर कानूनी तरीके से इस्तेमाल हो रहा है। 

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हिमाचल सरकार की एजेंसियां मूकदर्शक बनी हुई हैं। केंद्रीय एजेंसियों का भी इस पर कोई गौर नहीं है। प्रदेश सेब की पैदावार में जम्मू-कश्मीर के बाद देश का दूसरा बड़ा राज्य है। यहां करीब 4000 करोड़ का सालाना सेब कारोबार होता है। 
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अच्छी पैदावार लेने और बाजार में फलों को अच्छे दामों पर बेचने के लिए हिमाचल में प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर का इस्तेमाल होने लगा है। कई कंपनियां तरह-तरह के रसायनों को बागवानों को महंगे दामों पर बेच रही हैं। 
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सेब के पेड़ों की अच्छी ग्रोथ और इनसे अच्छी पैदावार लेने के लिए कई बागवान इनके लिए मुुंहमांगा दाम देने लगे हैं। ऐसे तमाम रसायनों का इस्तेमाल करना गैर कानूनी है।

 केंद्रीय कीटनाशक अधिनियम 1968 की धारा 38(2) के मुताबिक ऐसे तमाम रसायन तब तक इस्तेमाल नहीं किए जा सकते, जब तक इन्हें प्रतिबंधित दवाओं की सूची से हटा नहीं दिया जाता।

जम्मू-कश्मीर सरकार को भी नहीं दी अनुमति 

 banned chemical used to increase the size of apple

हाल ही में जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड को एक प्रस्ताव दिया। इसमें सेब के पौधों पर 1-एमसीपी नामक प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर के इस्तेमाल की मंजूरी मांगी। इसके जवाब में केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड ने तत्काल मंजूरी देने से इंकार किया।

इस बारे में एक कमेटी का गठन कर इससे रिपोर्ट मांगी है। कमेटी मेें बागवानी आयुक्त समेत अन्य विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। पूरी जांच-पड़ताल के बाद अगर ये पाया गया कि इसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होंगे।

केवल तभी इसे मंजूरी दी जा सकेगी। हिमाचल सरकार या इस तरह के रसायन बनाने वाली एजेंसियों की ओर से तो हिमाचल में सेब की फसल पर ऐसे रसायनों के इस्तेमाल को लेकर मंजूरी तक नहीं मांगी गई है।

मानव, पशु, वनस्पति और पर्यावरण के लिए खतरनाक दवाएं

 banned chemical used to increase the size of apple

अगर किसी दवा या रसायन को केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी हो तो ये मानव, पशु, वनस्पति और पर्यावरण के लिए खतरनाक हो सकती हैं।इन रसायनों का इस्तेमाल करने वाले बागवान इससे या तो अनजान बने हुए हैं

या फिर वे लाभ कमाने के लिए कानून-कायदों को दरकिनार कर रहे हैं। हिमाचल सरकार में प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा ने कहा कि अगर बागवान प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इस पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से चर्चा की जाएगी। इसकी पड़ताल करेंगे कि कोई रसायन किसी तरह से नुकसानदेह तो नहीं है। 

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