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Shimla News: बीमा कंपनी, बैंक को 26.53 लाख क्लेम के साथ चुकाना होगा 50 हजार मुआवजा

Sat, 27 Jun 2026 02:32 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jun 2026 02:32 AM IST
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2023 में भारी बारिश के कारण सेंटारोसा मिलान प्रोजेक्ट को हुआ था नुकसान
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आयोग ने शिकायतकर्ता को बीमा पॉलिसी न समझाने पर कड़ी आपत्ति जताई
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने बीमा कंपनी को उपभोक्ता को मुआवजा और क्लेम देने के आदेश दिए हैं। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी और यूको बैंक दोनों को शिकायतकर्ता के सेंटारोसा मिलान प्रोजेक्ट को हुए नुकसान के लिए 26,53,566 रुपये क्लेम राशि 9 फीसदी वार्षिक ब्याज शिकायत दर्ज की तारीख से भुगतान तक के साथ देने के आदेश दिया है।
आयोग ने मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 50,000 रुपये की अलग से राशि देने का आदेश दिया है। आयोग ने पाया कि कंपनी ने प्रीमियम तो 12 जुलाई 2023 को ही ले लिया था लेकिन पॉलिसी जारी करने में देरी की थी, साथ ही आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से पॉलिसी की शर्तें और नियम शिकायतकर्ता को न समझाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। हरियाणा निवासी शिकायतकर्ता परवरिश बेदी ने ठियोग क्षेत्र में अपने बैंक्वेट और रिजॉर्ट प्रोजेक्ट के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से ऋण लिया था। बैंक के माध्यम से ही इस प्रोजेक्ट का भारत सूक्ष्म उद्यम सुरक्षा पॉलिसी के तहत एक करोड़ रुपये का बीमा करवाया था। इसका प्रीमियम 12 जुलाई 2023 को काट लिया गया था। हालांकि, जुलाई-अगस्त 2023 की भारी बारिश के दौरान प्रोजेक्ट को काफी नुकसान हुआ था। संवाद
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बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया था क्लेम
बीमा कंपनी ने यह तर्क देकर क्लेम खारिज कर दिया कि पॉलिसी में 15 दिनों की वेटिंग पीरियड की शर्त थी और नुकसान इस अवधि के भीतर हुआ था। कंपनी का दावा था कि पॉलिसी 31 जुलाई 2023 को जारी हुई। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि प्रीमियम 12 जुलाई को प्राप्त हुआ तो बीमा कवर उसी दिन से प्रभावी माना जाएगा। ऐसे में 15 दिन को वेटिंग पीरियड नुकसान होने की तारीख तक पूरा हो चुका था। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियां केवल तकनीकी आधार पर या अपर्याप्त दस्तावेजों का बहाना बनाकर सही दावों को खारिज नहीं कर सकती।
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