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HP High Court: गोविंद सागर झील में डंपिंग पर रोक, एनएचएआई को नोटिस, वन सचिव से भी जवाब तलब

Tue, 23 May 2023 12:29 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 23 May 2023 12:29 PM IST
सार

 फोरलेन निर्माण के मलबे को गोविंद सागर झील में ठिकाने लगाने पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने झील में किसी भी तरह की डंपिंग करने पर तत्काल रोक लगा दी है। 

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Ban on dumping in Govind Sagar lake, notice to NHAI, response from Forest Secretary also sought
हिमाचल हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 किरतपुर-मनाली फोरलेन निर्माण के मलबे को गोविंद सागर झील में ठिकाने लगाने पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने झील में किसी भी तरह की डंपिंग करने पर तत्काल रोक लगा दी है। अदालत ने सचिव वन सहित एनएचएआई को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 12 जून को निर्धारित की है। फोरलेन विस्थापित और प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। आरोप है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने ठेकेदार को किरतपुर-मनाली सड़क को चौड़ा करने का कार्य सौंपा है।

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स्थानीय लोगों के कठोर विरोध के बावजूद भी भाखड़ा बांद में अवैध रूप से मलबा फेंका जा रहा है। इसकी स्थानीय प्रशासन और एनएचएआई को शिकायतें भी की गई हैं। उन्होंने याचिका में कहा कि बिलासपुर के बरमाणा और तुन्हु में एम्स के पास मलबे को डंप किया जा रहा है। इसके अलावा रघुनाथपुरा-मंडी भराड़ी सड़क को चौड़ा करते समय मलबे को बिलासपुर जिले में जलाशय में अवैध रूप से फेंका जा रहा है। अदालत को बताया कि सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआईएफआरआई) ने भाखड़ा बांध में मछली की आबादी में बड़ी गिरावट दर्ज की है। इसका मुख्य कारण झील में अवैध डंपिंग से गाद में हुई वृद्धि बताया गया है।
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गाद की वजह से विभिन्न मछली प्रजातियों के प्रजनन को नुकसान पहुंचाया गया है। आंकड़ों के हिसाब से 2014 में कुल वार्षिक मछली उत्पादन 1,492 मीट्रिक टन से घटकर लगभग 250 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। वर्ष 2022 में तीन हजार से अधिक स्थानीय परिवारों की आजीविका को प्रभावित किया गया है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के ठेकेदार पर मंडवान और अन्य नालों में मलबे के ट्रक को खाली करने का भी आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि गोविंद सागर में अवैध डंपिंग पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए और दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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सरकार ने प्राकृतिक जलस्रोतों के बेहतर इस्तेमाल के लिए क्या किया : हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि शिमला शहर में प्राकृतिक जल स्रोतों के बेहतर इस्तेमाल के लिए क्या कदम उठाए गए है। अदालत ने आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव को रिकॉर्ड के साथ तलब किया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 25 मई को निर्धारित की है। अदालत ने शिमला शहर में पानी की कमी को लेकर मुख्य सचिव को संबंधित अधिकारियों से बैठक कर प्राकृतिक जलस्रोतों के बेहतर इस्तेमाल के लिए संभावनाएं तलाशने के आदेश दिए थे। अदालत ने कहा था कि प्राकृतिक जलस्रोतों के इस्तेमाल से न केवल जंगल की आग बुझाने में सहायता मिलेगी, बल्कि घरेलू कार्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।


हाईकोर्ट ने शिमला बालिका आश्रम में हुई आग की घटना पर संज्ञान लिया है। जंगल में लगी आग आश्रम तक पहुंच गई थी। अग्निशमन की गाड़ियां आश्रम तक न पहुंचने के कारण काफी नुकसान हुआ था। शिमला शहर में पानी की किल्लत को लेकर दायर याचिका को भी इस मामले के साथ सुना जा रहा है। बता दें कि नगर निगम शिमला ने शहर में सभी प्राकृतिक जलस्रोतों को चिन्हित किया है। इन स्रोतों से प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख लीटर पानी निकलता है। अदालत ने पाया है कि इन स्रोतों को विकसित कर पानी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

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