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Shimla News: आईजीएमसी यूरोलॉजी ओपीडी के बाहर कर्मचारी से उलझे तीमारदार

Mon, 28 Oct 2024 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Oct 2024 11:59 PM IST
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Attendant clashed with employee outside IGMC Urology OPD
जगह की कमी के चलते सीढि़यों पर के मरीजों के बैठने पर हुआ विवाद
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अस्पताल प्रबंधन से बेंचों की संख्या बढ़ाने की मांग
मरीजों को घंटों करना पड़ता हैै अपनी बारी का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) की यूरोलॉजी ओपीडी के बाहर सोमवार सुबह तीमारदार और कर्मचारी आपस में उलझ पड़े। इसके चलते यहां पर कुछ देर के लिए माहौल गरमाया रहा।

आईजीएमसी के यूरोलॉजी ओपीडी में मूत्र संक्रमण, मूत्राशय की पथरी, यूरिनरी ट्रैक्ट संक्रमण, किडनी स्टोन जैसी बीमारियों का इलाज करवाने के लिए भारी संख्या में मरीज आते हैं। इनमें अधिकांश संख्या में 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग मरीज शामिल होते हैं। मौजूदा समय में जहां ओपीडी चल रही है, वहां जगह की काफी कमी है। यहां बैठने के लिए लगे बेंच कम हैं जिस कारण मरीज ओपीडी के बाहर सीढि़यों में बैठ जाते हैं। इससे अन्य लोगों को आवाजाही करने में दिक्कत होती है। ओपीडी में दो चिकित्सक ही होते हैं और 150 के करीब मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। इस कारण मरीजों को काफी देर तक यहां इंतजार करना पड़ता है।
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सोमवार को भी तीमारदार अपने मरीज की बारी के इंतजार में यहां सीढि़यों पर बैठ गए। इसके बाद अस्पताल के एक कर्मचारी ने उन्हें यहां पर बैठने से मना किया। इससे तीमारदार और मरीज भड़क गए। तीमारदार अभिषेक ने कहा कि एक तो काफी देर बाद नंबर आता है। इस वजह से घंटों यहां पर खड़े रहना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने मांग की है कि ओपीडी खुली जगह पर शिफ्ट की जाए। वहीं आनी के लेदराम ने बताया कि इस ओपीडी में अधिकांश बुजुर्ग लोग होते हैं, ऐसे में जब तक उनका नंबर नहीं लग जाए तब तक उनके बैठने के लिए पर्याप्त सुविधा होनी चाहिए।
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अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती करें : सुरेश
जुब्बल के सुरेश कुमार ने कहा कि उनका कई सालों से उपचार चल रहा है। मरीजों की भीड़ ज्यादा है, तो ऐसे में सरकार को सुपर स्पेशलिटी विभागों में अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती करनी चाहिए। ओपीडी के दिनों की संख्या बढ़ानी चाहिए।


आपात स्थिति में छोड़ कर चले जाते हैं चिकित्सक
नारकंडा के बाग चंद ने कहा कि सुबह साढ़े नौ बजे से यहां बैठा हूं। सवा बारह बज गए हैं लेकिन अभी तक 30 मरीजों को ही टोकन नंबर देकर उपचार के लिए बुलाया है। पिता को यूरिन बैग लगा है लेकिन यहां पर बैठने की सुविधा तक नहीं है। प्रबंधन सुविधाएं उपलब्ध करवाए। बताया कि अगर इमरजेंसी केस आता है तो चिकित्सक ओपीडी छोड़कर चले जाते हैं।
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