मनाली में सेब बगीचे में बैठकर कविताएं लिखते थे अटल
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ब्यास किनारे बसी मनु की नगरी मनाली की सुंदर और शांत वादियों से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का विशेष लगाव था। घाटी की प्राकृतिक सुंदरता से मोहित होकर उन्होंने वर्ष 1995 में मनाली से सटे लेफ्ट बैंक के प्रीणी गांव में जमीन खरीदी और अपना अशियाना बनाया।
वे हिमाचल को अपना दूसरा घर मानते थे। 15 बीघा क्षेत्र में ढाई मंजिला घर के अलावा खेत और सेब का बगीचा है। अकसर मनाली प्रवास के दौरान अटल धान के खेतों और सेब बगीचे में बैठ कविताएं लिखते थे।
बर्फ से लकदक चोटियां और देवदार के ऊंचे पेड़ उन्हें बहुत लुभाते थे। प्रधानमंत्री बनने से पहले वह जगतसुख में विद्या प्रकाश भारद्वाज के घर पर किराए पर रहते थे।
पहाड़ी शैली में बनाया ढाई मंजिला मकान
करीब 23 वर्ष पूर्व उन्होंने पहाड़ी शैली में ढाई मंजिला मकान बनाया। घर के आसपास उनके खेत हैं जिनमें धान की खेती होती है। उनका रॉयल सेब का बगीचा भी है। घर में एक बड़ा आंगन है जहां फुर्सत के पलों में वाजपेयी टहलते हुए घाटी की वादियों को निहारते थे।
अटल के दौरे के दौरान उनसे मिलने के लिए दिनभर लोगों का तांता लगा रहता था। घर के आंगन में उनसे मिलने वालों के लिए वह स्वयं ही कुर्सियां लगाया करते थे। प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान वे गर्मियों में एक सप्ताह से लेकर 12 दिनों तक यहां समय बिताया करते थे।
प्रीणी से ही सरकार चलाया करते थे। पूरा पीएमओ यहां पहुंच जाता था। उन्होंने यहां से तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीस, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री शांता कुमार समेत कई केंद्रीय मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ देश की सुरक्षा को लेकर कई अहम फैसले भी लिए थे।
कुल्लू के लाल चावल, ट्राउट और सिड्डू के थे शौकीन
अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने घर के साथ एक मंदिर का निर्माण करवाया है जिसमें गणेश, सूर्य, शिव और कार्तिकेय की मूर्तियां स्थापित की हैं। यहां वह पूजा अर्चना करते थे। इसके लिए उन्होंने मंदिर में पूजा के लिए एक पुजारी को भी रखा था।
अटल खेत-खलियानों के साथ घाटी के मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेते थे। वर्ष 2006 में अटल आखिरी बार प्रीणी आए थे। उसके बाद से उनकी तबीयत खराब रहने लगी। हर साल उनके जन्मदिन पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती थी।
अटल को कुल्लू का राजमाह, लाल चावल और सिड्डू बहुत पसंद थे। वह ट्राउट मछली के भी शौकीन थे। राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर रोहतांग टनल बनाने का फैसला भी अटल ने प्रीणी स्थित अपने घर से लिया था।
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना को रोहतांग होकर जाने में बहुत समय लगता था। राष्ट्रीय सुरक्षा के मददेनजर उन्होंने रोहतांग टनल की घोषणा की। उनका दूसरा घर इन दिनों वीरान है। कभी कभार उनकी बेटी यहां पहुंचती है।