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Shimla News: आषाढ़ अमावस्या कल, स्नान-दान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व
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आज शाम 6:49 बजे से शुरू होगी अमावस्या तिथि
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। आषाढ़ अमावस्या इस वर्ष 14 जुलाई को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और पितरों के निमित्त तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार स्नान और दान का शुभ मुहूर्त मंगलवार सुबह 4:30 से 10:43 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि अमावस्या तिथि 13 जुलाई को शाम 6:49 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई को दोपहर 3:12 बजे समाप्त होगी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है। नौटियाल ने बताया कि इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण करने और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि विधि-विधान से स्नान, दान और पितृ तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। आषाढ़ अमावस्या इस वर्ष 14 जुलाई को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और पितरों के निमित्त तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार स्नान और दान का शुभ मुहूर्त मंगलवार सुबह 4:30 से 10:43 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि अमावस्या तिथि 13 जुलाई को शाम 6:49 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई को दोपहर 3:12 बजे समाप्त होगी।
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उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है। नौटियाल ने बताया कि इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण करने और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि विधि-विधान से स्नान, दान और पितृ तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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