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Shimla News: ग्रीन पटाखों के नाम पर कहीं सामान्य पटाखे तो नहीं खरीद रहे आप
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पैकेट पर हरे रंग और क्यूआर कोड से नहीं होगी पहचान, सीएसआईआर-नीरी की वेबसाइट बताएगी पटाखे ग्रीन या सामान्य
ग्रीन पटाखों से कम होता वातावरण प्रदूषित
खास खबर
हर्षित शर्मा
शिमला। दिवाली पर प्रदूषण कम करने के लिए ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है, लेकिन बाजार में खरीदारी के दौरान उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल इनकी पहचान का होता है। केंद्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) ने इस बारे दिशा निर्देश जारी किए हैं।
ग्रीन पटाखों की पहचान में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इनका पंजीकरण उत्पाद के आधार पर होता है। उत्पाद के पंजीकरण और उसकी प्रमाणिकता का मिलान सीएसआईआर-नीरी की वेबसाइट पर किया जा सकता है। इससे पता लगाया जा सकता है कि पटाखे ग्रीन हैं या सामान्य। पैकेट पर ग्रीन क्रैकर लिखा होना, हरे रंग का निशान बना होना या क्यूआर कोड छपा होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि पटाखा वास्तव में ग्रीन श्रेणी का है। सामान्य पटाखों को भी आकर्षक पैकेजिंग और बड़े-बड़े दावों के साथ बेचा जा सकता है। ग्रीन पटाखों को पारंपरिक पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से विकसित किया है। इन्हें वैज्ञानिक शोध के आधार पर तैयार किया जाता है। इनकी रासायनिक संरचना में बदलाव कर जलने के दौरान निकलने वाले प्रदूषकों की मात्रा घटाई
जाती है।
केंद्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) ने इनके लिए उत्सर्जन संबंधी मानक निर्धारित किए हैं। इन मानकों के अनुसार पारंपरिक पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखों से निकलने वाले कणीय पदार्थों का उत्सर्जन कम से कम 30 फीसदी कम होना चाहिए। एक अन्य निर्धारित श्रेणी में कणीय पदार्थों का उत्सर्जन 20 फीसदी और गैसीय प्रदूषकों का उत्सर्जन कम से कम 10 फीसदी घटाना अनिवार्य है। सामान्य पटाखों के जलने से हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण फैलते हैं। इनके साथ सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें भी निकलती हैं। यह प्रदूषक हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। ग्रीन पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक मिश्रण और कच्चे माल में बदलाव कर इन उत्सर्जनों को कम करने का प्रयास किया जाता है। कुछ हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध या नियंत्रण रखा है। हालांकि ग्रीन पटाखों का मतलब प्रदूषण मुक्त पटाखे नहीं है। इन्हें जलाने से भी धुआं, आवाज और प्रदूषण होता है। इनका उद्देश्य सामान्य पटाखों की तुलना में पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम करना है।
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क्यूआर कोड देखकर न करें पटाखों की पहचान
ग्रीन पटाखों की प्रमाणिकता को लेकर सीएसआईआर-नीरी ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि वह ग्रीन पटाखों के पैकेट पर क्यूआर कोड या बारकोड जारी नहीं करता है। ऐसे में पैकेट पर छपे क्यूआर कोड को प्रमाणिकता का आधार मानना सही नहीं है। संस्थान ने अपने नाम पर जारी किए जा रहे फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्रों और परीक्षण रिपोर्टों को लेकर भी सावधान किया है। उपभोक्ताओं को पटाखे खरीदते समय निर्माता और संबंधित उत्पाद के पंजीकरण की जानकारी की जांच करनी चाहिए।
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ग्रीन पटाखों से कम होता वातावरण प्रदूषित
खास खबर
हर्षित शर्मा
शिमला। दिवाली पर प्रदूषण कम करने के लिए ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है, लेकिन बाजार में खरीदारी के दौरान उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल इनकी पहचान का होता है। केंद्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) ने इस बारे दिशा निर्देश जारी किए हैं।
ग्रीन पटाखों की पहचान में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इनका पंजीकरण उत्पाद के आधार पर होता है। उत्पाद के पंजीकरण और उसकी प्रमाणिकता का मिलान सीएसआईआर-नीरी की वेबसाइट पर किया जा सकता है। इससे पता लगाया जा सकता है कि पटाखे ग्रीन हैं या सामान्य। पैकेट पर ग्रीन क्रैकर लिखा होना, हरे रंग का निशान बना होना या क्यूआर कोड छपा होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि पटाखा वास्तव में ग्रीन श्रेणी का है। सामान्य पटाखों को भी आकर्षक पैकेजिंग और बड़े-बड़े दावों के साथ बेचा जा सकता है। ग्रीन पटाखों को पारंपरिक पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से विकसित किया है। इन्हें वैज्ञानिक शोध के आधार पर तैयार किया जाता है। इनकी रासायनिक संरचना में बदलाव कर जलने के दौरान निकलने वाले प्रदूषकों की मात्रा घटाई
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जाती है।
केंद्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) ने इनके लिए उत्सर्जन संबंधी मानक निर्धारित किए हैं। इन मानकों के अनुसार पारंपरिक पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखों से निकलने वाले कणीय पदार्थों का उत्सर्जन कम से कम 30 फीसदी कम होना चाहिए। एक अन्य निर्धारित श्रेणी में कणीय पदार्थों का उत्सर्जन 20 फीसदी और गैसीय प्रदूषकों का उत्सर्जन कम से कम 10 फीसदी घटाना अनिवार्य है। सामान्य पटाखों के जलने से हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण फैलते हैं। इनके साथ सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें भी निकलती हैं। यह प्रदूषक हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। ग्रीन पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक मिश्रण और कच्चे माल में बदलाव कर इन उत्सर्जनों को कम करने का प्रयास किया जाता है। कुछ हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध या नियंत्रण रखा है। हालांकि ग्रीन पटाखों का मतलब प्रदूषण मुक्त पटाखे नहीं है। इन्हें जलाने से भी धुआं, आवाज और प्रदूषण होता है। इनका उद्देश्य सामान्य पटाखों की तुलना में पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम करना है।
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क्यूआर कोड देखकर न करें पटाखों की पहचान
ग्रीन पटाखों की प्रमाणिकता को लेकर सीएसआईआर-नीरी ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि वह ग्रीन पटाखों के पैकेट पर क्यूआर कोड या बारकोड जारी नहीं करता है। ऐसे में पैकेट पर छपे क्यूआर कोड को प्रमाणिकता का आधार मानना सही नहीं है। संस्थान ने अपने नाम पर जारी किए जा रहे फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्रों और परीक्षण रिपोर्टों को लेकर भी सावधान किया है। उपभोक्ताओं को पटाखे खरीदते समय निर्माता और संबंधित उत्पाद के पंजीकरण की जानकारी की जांच करनी चाहिए।