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भंगरोट के फेब्रिकेटेड कोविड अस्पताल के डिजाइन को मंजूरी
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मंडी। नेरचौक के समीप भंगरोटू में बनने वाले फेब्रिकेटेड कोविड अस्पताल के डिजाइन को मंजूरी मिल गई है। अस्थायी अस्पताल का निर्माण पूरा होने में दो माह से अधिक का समय लग सकता है। सौ बिस्तर वाला यह अस्पताल कोविड संक्रमितों की जरूरतों को पूरा करने वाला होगा। इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत रहेगी। इसका प्रस्ताव बनाकर नेरचौक मेडिकल अस्पताल ने सरकार को भेज दिया है।
वर्तमान में कोविड अस्पताल नेरचौक मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। इस कारण यहां ओपीडी बंद है। नतीजतन मंडी, कुल्लू, लाहौल स्पीति और बिलासपुर जिले के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावितों ने नेरचौक कोविड अस्पताल को कहीं अन्य जगह शिफ्ट करके यहां ओपीडी समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने की मांग सीएम जयराम ठाकुर से की थी। इसके बाद सीएम ने मंडी समेत शिमला और कांगड़ा जिले में भी अस्थायी रूप से फेब्रिकेटेड हट बनाने के निर्देश दिए थे।
उधर, फेब्रिकेटेड अस्पताल का निर्माण दो माह बाद पूरा होने को लेकर प्रशासन और कोविड अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल उठना शुरू हो गए हैं। तर्क दिया जा रहा है कि अस्थायी कोविड अस्पताल की सबसे अधिक जरूरत नवंबर, दिसंबर और जनवरी में थी, जब कोरोना केस बढ़ रहे हैं। सुस्त कार्य शैली के चलते अस्पताल तब बनकर खड़ा होगा जब कोरोना केस कम होना शुरू हो जाएंगे। उधर नेरचौक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल आरसी ठाकुर ने कहा कि दो माह में अस्थायी कोविड अस्पताल का काम पूरा हो जाएगा। डिजाइन को मंजूरी दे दी गई है। यहां कोविड रोगियों के लिए बेहतर सुविधाएं होंगी। अस्थायी कोविड अस्पताल बनने के बाद ही नेरचौक मेडिकल कॉलेज में सामान्य ओपीडी शुरू होगी।
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वर्तमान में कोविड अस्पताल नेरचौक मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। इस कारण यहां ओपीडी बंद है। नतीजतन मंडी, कुल्लू, लाहौल स्पीति और बिलासपुर जिले के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावितों ने नेरचौक कोविड अस्पताल को कहीं अन्य जगह शिफ्ट करके यहां ओपीडी समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने की मांग सीएम जयराम ठाकुर से की थी। इसके बाद सीएम ने मंडी समेत शिमला और कांगड़ा जिले में भी अस्थायी रूप से फेब्रिकेटेड हट बनाने के निर्देश दिए थे।
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उधर, फेब्रिकेटेड अस्पताल का निर्माण दो माह बाद पूरा होने को लेकर प्रशासन और कोविड अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल उठना शुरू हो गए हैं। तर्क दिया जा रहा है कि अस्थायी कोविड अस्पताल की सबसे अधिक जरूरत नवंबर, दिसंबर और जनवरी में थी, जब कोरोना केस बढ़ रहे हैं। सुस्त कार्य शैली के चलते अस्पताल तब बनकर खड़ा होगा जब कोरोना केस कम होना शुरू हो जाएंगे। उधर नेरचौक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल आरसी ठाकुर ने कहा कि दो माह में अस्थायी कोविड अस्पताल का काम पूरा हो जाएगा। डिजाइन को मंजूरी दे दी गई है। यहां कोविड रोगियों के लिए बेहतर सुविधाएं होंगी। अस्थायी कोविड अस्पताल बनने के बाद ही नेरचौक मेडिकल कॉलेज में सामान्य ओपीडी शुरू होगी।
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