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Shimla News: जिले में 95 फीसदी सेब सीजन खत्म, मिट्टी का परीक्षण करवाने की सलाह

Sun, 05 Oct 2025 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Oct 2025 11:55 PM IST
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apple season 90 percent complited
कृषि विज्ञान केंद्र शिमला ने सैंपल लेना किया शुरू, 15 अक्तूबर से शुरू होगी टेस्टिंग
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में 95 फीसदी सेब सीजन खत्म हो चुका है। ऊपरी शिमला के कुछ बगीचों में सेब तुड़ान के लिए बचा है। ऐसे में मृदा वैज्ञानिकों ने सेब तुड़ान के तुरंत बाद बागवानों को मिट्टी का परीक्षण करवाने की सलाह दी है।
बगीचों से मिट्टी के नमूने लेने का सबसे अच्छा समय सेब के तुड़ान के बाद होता है, इसलिए बागवान मिट्टी परीक्षण के लिए अक्तूबर में मिट्टी के नमूने ले सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र शिमला (केविके) ने मिट्टी के नमूने लेने शुरू कर दिए हैं, वहीं 15 अक्तूबर के बाद यहां पर टेस्टिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। मृदा वैज्ञानिकों का कहना है कि मृदा परीक्षण एक मृदा-प्रबंधन का साधन है जिसका उपयोग मिट्टी की उर्वरता के साथ-साथ फसलों के लिए उर्वरक आवश्यकताओं को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। मृदा परीक्षण से बहुमूल्य जानकारी मिलती है जो मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक है। मिट्टी के पोषक तत्वों की सही मात्रा का पता करके एक किसान आसानी से मिट्टी और फसल की आवश्यकताओं के अनुसार उर्वरक को समायोजित कर सकता है जिससे उर्वरक के व्यय को कम और अधिक किया जा सकता है। मृदा परीक्षण के माध्यम से किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों की सिफारिशें प्राप्त कर सकते हैं जो सही उपज के लिए पौधों की वृद्धि को बढ़ाती हैं।
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मृदा परीक्षण के महत्व को ध्यान में रखते हुए रोहडू स्थित कृषि विज्ञान केंद्र शिमला के मृदा वैज्ञानिक डॉ. नागेंद्र पाल बुटेल ने शिमला जिला के सभी सेब बागवानों से अनुरोध किया है कि वे मिट्टी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए बिना अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अक्तूबर और नवंबर महीने के दौरान अपनी मिट्टी का विश्लेषण अवश्य करवाएं। बागवान अपने बगीचे की मिट्टी की जांच कृषि विज्ञान केंद्र शिमला रोहडू, क्षेत्रीय बागवानी एवं प्रशिक्षण केंद्र, मशोबरा और डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सोलन से करवा सकते हैं।
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तौलिए के बाहर से न लेकर आएं सैंपल : डॉ. उषा
कृषि विज्ञान केंद्र शिमला की प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उषा शर्मा ने बताया कि बागवान परीक्षण के लिए मिट्टी के सैंपल तौलिए के बाहर से लेकर न आएं। तने से करीब ढाई फूट बाहर से सैंपल लाएं, जहां खादें डालते हैं। बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र शिमला में किसानों को समय पर और सही मिट्टी परीक्षण परिणाम प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने किसानों से बड़े पैमाने पर अपनी मिट्टी का परीक्षण करवाने का अनुरोध किया है।
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