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Shimla News: सेब उत्पादन घटा, मंडियों में 55 फीसदी कम पहुंचा फल
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बागवानों को अच्छे मिल रहे सेब के दाव
बीते साल के मुकाबले 28.74 लाख बॉक्स की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सेब सीजन में इस बार फल मंडियों में फलों की आपूर्ति की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम है। कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) शिमला-किन्नौर के आंकड़ों के अनुसार 18 अगस्त तक इस साल 23,36,814 बॉक्स सेब मंडियों में पहुंचे हैं।
पिछले वर्ष 18 अगस्त तक 52,10,730 बॉक्स मंडियों में पहुंच चुके थे। इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस बार 28,73,916 बॉक्स कम पहुंचे हैं। सेब की आपूर्ति में लगभग 55.15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। एपीएमसी के अनुसार शिमला-किन्नौर के तहत आठ मंडियां आती हैं। इनमें भट्ठाकुफर, रोहड़ू, नेरवा, खड़ापत्थर, पराला, मेहंदली, शिलारू, अनु और टापरी शामिल हैं। एपीएमसी के अधिकारियों के अनुसार इस बार बीते वर्ष के मुकाबले सेब की आपूर्ति काफी कम है। इस बार मौसम की बड़ी मार पड़ी है। मौसम के कारण उत्पादन कम हुआ है। इसके चलते ही मंडियों में सेब की आवक काफी कम है। शिमला और किन्नौर सेब उत्पादन के दो प्रमुख जिले हैं। इन दोनों जिलों में टाइडमैन, रॉयल, स्पर, गाला, रेड गोल्ड, गोल्डन समेत कई अन्य किस्मों के सेब का उत्पादन होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि फसल का उत्पादन कम होने के बाद भी बागवानों को सीजन में अभी तक अच्छे दाम मिल रहे हैं।
कोट
इस बार फल मंडियों में सेब की आपूर्ति काफी कम है। एपीएमसी शिमला-किन्नौर के तहत आठ मंडियों में सेब का कारोबार होता है। इस बार 18 अगस्त तक इन मंडियों में 23,36,814 बॉक्स सेब पहुंचे हैं।
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-रवींद्र कुमार शर्मा, सचिव, एपीएमसी शिमला-किन्नौर
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बीते साल के मुकाबले 28.74 लाख बॉक्स की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सेब सीजन में इस बार फल मंडियों में फलों की आपूर्ति की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम है। कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) शिमला-किन्नौर के आंकड़ों के अनुसार 18 अगस्त तक इस साल 23,36,814 बॉक्स सेब मंडियों में पहुंचे हैं।
पिछले वर्ष 18 अगस्त तक 52,10,730 बॉक्स मंडियों में पहुंच चुके थे। इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस बार 28,73,916 बॉक्स कम पहुंचे हैं। सेब की आपूर्ति में लगभग 55.15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। एपीएमसी के अनुसार शिमला-किन्नौर के तहत आठ मंडियां आती हैं। इनमें भट्ठाकुफर, रोहड़ू, नेरवा, खड़ापत्थर, पराला, मेहंदली, शिलारू, अनु और टापरी शामिल हैं। एपीएमसी के अधिकारियों के अनुसार इस बार बीते वर्ष के मुकाबले सेब की आपूर्ति काफी कम है। इस बार मौसम की बड़ी मार पड़ी है। मौसम के कारण उत्पादन कम हुआ है। इसके चलते ही मंडियों में सेब की आवक काफी कम है। शिमला और किन्नौर सेब उत्पादन के दो प्रमुख जिले हैं। इन दोनों जिलों में टाइडमैन, रॉयल, स्पर, गाला, रेड गोल्ड, गोल्डन समेत कई अन्य किस्मों के सेब का उत्पादन होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि फसल का उत्पादन कम होने के बाद भी बागवानों को सीजन में अभी तक अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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कोट
इस बार फल मंडियों में सेब की आपूर्ति काफी कम है। एपीएमसी शिमला-किन्नौर के तहत आठ मंडियों में सेब का कारोबार होता है। इस बार 18 अगस्त तक इन मंडियों में 23,36,814 बॉक्स सेब पहुंचे हैं।
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-रवींद्र कुमार शर्मा, सचिव, एपीएमसी शिमला-किन्नौर