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सरकार के फैसले पर बागवानों ने उठाए सवाल

Mon, 11 Aug 2014 11:56 AM IST
Updated Mon, 11 Aug 2014 11:56 AM IST
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apple packing: producers raised question on govt decision

हिमाचल में साढ़े 22 किलो की पेटी में सेब पैकिंग को लेकर राज्य सरकार ने कानून तो लागू कर दिया है, लेकिन इसके लिए बाजार में न तो साढ़े 22 किलो की पेटियां मुहैया हैं और न ही यूनिवर्सल कार्टन।

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अधिसूचना जारी होने से पहले ही बागवानों ने 26 किलो की क्षमता वाली पेटियां खरीद लीं। अब उन्हीं पेटियों में सेब भरकर मंडियों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार ने कार्टन उपलब्ध कराए बगैर जल्दबाजी में कानून लागू कर दिया है।
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प्रदेश सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मानकों से प्रतिस्पर्धा के नाम पर बागवानों के लिए साढ़े 22 किलो की पेटी अनिवार्य कर दी है। यह अधिसूचना जुलाई को जारी हुई थी।

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बागवानों ने खरीद ली थी पेटियां

apple packing: producers raised question on govt decision

वहीं, अधिसूचना जारी होने से पहले ही 80 फीसदी बागवानों ने सोलन, बद्दी और दूसरे बाजारों से गत्ते की पेटियां इससे पहले ही खरीद ली थीं। क्योंकि बागवान जानते हैं कि पीक सीजन में इन पेटियों के दाम बेतहाशा बढ़ जाते हैं। खराब से खराब गत्ते की एक पेटी 35 रुपए की पड़ती है।

औसत दर्जे की पेटी की कीमत भी 40.47 रुपए है। मुश्किल यही नहीं है। बागवानों ने बताया कि मार्केट में 22 किलो की पेटियां मिल ही नहीं रहीं तो वह क्या करें। मजबूरन 26 किलो की पेटी में 22 किलो सेब पैक कर रहे हैं।

वहीं, जो बागवान साढ़े 22 किलो की पैकिंग में अपनी फसल मंडियों में बेच रहे हैं, उन्हें कम कीमतें मिल रही हैं जबकि 24 से 26 किलो की पेटी में फसल मंडियों में भेजने वाले बागवानों को उत्पाद की अधिक कीमतें मिल रही हैं।

किराया बढ़ने से परेशान बागवान

apple packing: producers raised question on govt decision

बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स के गृह क्षेत्र कोटगढ़ में सेब की पैकिंग सालों से 22 किलो की पेटी में ही होती आ रही है। पमलाई थानाधार के बागवान कर्मचंद मेहता का कहना है कि कोटगढ़ के बागवानों के लिए सेब की 22 किलो की पैकिंग नई बात नहीं है।

सालों से यहां सेब की पेटी 22 किलो की ही होती है। कोटखाई क्षेत्र में 26 से 28 किलो की पैकिंग होती है, जिससे मार्केट में रेट बिगड़ते हैं। सेब का भाड़ा वजन नहीं बल्कि पेटी के हिसाब से तय होता है।

जिला प्रशासन ने हर साल की तरह भाड़े में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। इससे सेब के कारोबार का अर्थशास्त्र बिगड़ गया है।

प्रशासन ने माना, देरी हुई

apple packing: producers raised question on govt decision

‘सेब की पैकिंग को साढ़े 22.50 किलो तक करने की सरकार की मंशा कहीं गलत नहीं रही। यह जरूर है कि अध्यादेश लाने में थोड़ी देरी हो गई। यह काम राज्य सरकार के स्तर पर जनवरी में ही हो जाना चाहिए था। इससे समय पर इसके बायलाज बन जाते। बायलाज और रूल्स बनाए जा रहे हैं। ये जल्दी बन जाएंगे। अब नई व्यवस्था को लागू करने में वक्त तो लगता ही है। अगले सीजन में व्यवस्था इस बार से अच्छी हो जाएगी।
- देवेंद्र श्याम, सलाहकार, कृषि उत्पाद विपणन बोर्ड, हिमाचल सरकार

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