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परंपरा, एक दिन में कटेंगे 40 करोड़ के बकरे

Sun, 11 Jan 2015 07:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरमौर
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरमौर Updated Sun, 11 Jan 2015 07:54 PM IST
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Animal sacrifice on the eve of lohri maghi in Sirmour Himachal Pradesh.

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में सोमवार से माघी त्योहार शुरू हो रहा है। यहां के तीन विधानसभा क्षेत्रों में सदियों से हर घर में बकरा काटने की परंपरा है। सोमवार को एक अनुमान के अनुसार क्षेत्र में करीब 40 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के बकरे काटने की तैयारी है। माघी त्योहार में यदि कोई परिवार बकरा न काटे तो सामाजिक तिरस्कार के साथ उसे गांव वालों के ताने (व्यंग्य) भी सुनने पड़ते हैं।

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गरीब परिवारों को गहने बेचकर, जमीन गिरवी रखकर या फिर साहूकारों से कर्ज लेकर बकरे खरीदकर काटने के लिए विवश होना पड़ता है। हालांकि, परंपरा के अनुसार बकरे घर-गौशाला के भीतर नहीं बल्कि सार्वजनिक स्थलों पर काटे जाते हैं। प्रदेश हाईकोर्ट के सार्वजनिक स्थान पर पशुओं की बलि पर रोक के बाद जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को इसे रोकना एक चुनौती बन गया है।
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परंपरा के खिलाफ गए तो समाज से बहिष्कार

Animal sacrifice on the eve of lohri maghi in Sirmour Himachal Pradesh.

सिरमौर के शिलाई, रेणुका और पच्छाद विधानसभा क्षेत्र के लोग इस परंपरा से सबसे अधिक बंधे हुए हैं। शायद ही ऐसा कोई परिवार हो, जो इस परंपरा के खिलाफ जाता हो। क्योंकि परंपरा के खिलाफ गया तो समाज से उसका बहिष्कार कर दिया जाएगा। नाहन और पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्रों में यह परंपरा थोड़ी कम है।

एक अनुमान के अनुसार पांचों विधानसभा क्षेत्रों में तकरीबन 20 से 25 हजार ऐसे परिवार हैं जोकि माघी त्योहार के दिन हर हाल में एक से दो बकरे काटते हैं। इसके लिए घरों में विभिन्न प्रजाति के बकरे और मेड़े पाले जाते हैं। जो परिवार बकरे नहीं पालते, उन्हें खरीदना पड़ता है। त्योहार के दौरान बकरों की कीमतें आसमान छूने लगती हैं।

कैसे कटते हैं बकरे

Animal sacrifice on the eve of lohri maghi in Sirmour Himachal Pradesh.

एक बकरे की कीमत न्यूनतम 15 से 20 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। हालांकि गिरिपार क्षेत्र में दस साल से शाकाहारी लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है, लेकिन इनकी संख्या बेहद कम है। प्रसिद्ध व्यंजनों में असकली, तेलपकी, सिड़कू, लुश्के, पटांडे आदि शामिल हैं। कुछ लोग गुड़-शक्कर तथा घी का शाकाहारी भोज तैयार कर त्योहार मनाते हैं। सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के हर गांव में एक समूह में लोग एकत्रित होते हैं। इसके बाद जिस परिवार का बकरा रहता है, उस बकरे को किसी दूसरे परिवार का व्यक्ति काटता है।

इसके लिए काफी पहले से ही हथियार तेज किए जाते हैं। कोर्ट के आदेश के बाद पहला त्योहार- हाईकोर्ट की ओर से सार्वजनिक और धार्मिक स्थानों पर पशु बलि पर कुछ माह पहले ही रोक लगाई है। उस फैसले के बाद सिरमौर में पहली बार माघी का त्योहार मनाने की तैयारी है। ऐसे में सवाल यह है कि स्थानीय प्रशासन की ओर से किस तरह से सार्वजनिक स्थलों पर बकरे कटने पर अंकुश लगाया जा रहा है।

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एसपी बोले, नहीं चढ़ाने देंगे बलि

Animal sacrifice on the eve of lohri maghi in Sirmour Himachal Pradesh.

सिरमौर के एसपी बलबीर सिंह ठाकुर ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों पर सार्वजनिक एवं धार्मिक स्थलों पर पशु बलि देने पर प्रतिबंध है। यदि सार्वजनिक एवं धार्मिक स्थलों पर पशु बलि दिए जाने का कोई मामला सामने आता है तो पुलिस उस पर सख्ती से कार्रवाई करेगी। संबंधित थानों एवं पुलिस चौकियों को पहले ही निर्देश जारी किए गए हैं।

गौर हो कि 2 सिंतबर 2014 को हिमाचल हाइकोर्ट ने मंदिरों में अनुष्ठान के नाम पर दी जाने वाली पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। अपने आदेश में हाइकोर्ट की बेंच ने कहा था कि सभी जिलों के डिप्टी कमीश्नर, एसपी और स्टेशन हेड ऑफिसर की यह जिम्मेदारी रहेगी कि पशु बलि पर पूरी तरह रोक लगे। आदेशों की अवमानना करने वालों पर उचित कार्रवाई भी की जाए।

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