आंध्रप्रदेश के फार्मूले से बुझेगी हिमाचल की प्यास!
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प्रदेश में हैंडपंपों और ट्यूबवेलों को रिचार्ज करने के लिए आंध्रप्रदेश का मॉडल अपनाया जाएगा। ये मॉडल हिमाचल सरकार को भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सुझाया है।
हिमाचल में वर्तमान में हजारों हैंडपंप और ट्यूबवेल लगे हैं, मगर इनमें से बड़ी संख्या में गर्मियों में तो ठप पड़ जाते हैं। वजह यह है कि इनमें जलस्तर बहुत नीचे पहुंच जाता है।
हाल ही में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से हिमाचल सरकार को पत्र आया है। केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी आर. सुब्रमण्यम ने इसमें कहा है कि नेशनल जल बोर्ड के निर्देश पर आंध्रप्रदेश और तेलंगाना का ट्यूबवेल रिचार्ज मॉडल हिमाचल में भी अपनाया जाए।
केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को भेजा पत्र
इस पत्र के साथ आंध्रप्रदेश के मॉडल की प्रति भी प्रदेश सरकार को भेजी है। साथ ही कहा है कि इसे पूरे देश में अपनाया जा रहा है। इसके लिए हैंडपंपों और ट्यूबवेलों के इर्द-गिर्द मनरेगा के माध्यम से एक ढांचा खड़ा किया जाएगा।
ये ढांचा कच्चे टैंकों, तालाबों आदि के रूप में होगा। ऐसे ढांचे बनाने का काम भी मनरेगा में ही किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार से आए निर्देश पर गौर किया जा रहा है। हिमाचल में भी आंध्रप्रदेश के मॉडल को लागू किया जाएगा।
केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी आर. सुब्रमण्यम ने प्रदेश सरकार को भेजे पत्र में यह भी कहा है कि प्रदेश में रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेटिंग ढांचों पर ध्यान दिया जाए। नए वित्त वर्ष में इस तरह के ढांचों को प्रत्येक पंचायत स्तर पर अधिक से अधिक संख्या में खड़ा करने के निर्देश दिए गए हैं।