अमर उजाला संवाद: अंधाधुंध बिजली प्रोजेक्ट, बेतरतीब निर्माण तबाही का कारण, विशेषज्ञ बोले- नहीं संभले तो...
अमर उजाला कार्यालय शिमला में शनिवार को संवाद का आयोजन किया गया। संवाद का विषय था-प्राकृतिक आपदाएं एवं हिमाचल का विकास मॉडल।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में हर साल प्राकृतिक आपदा से जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है। अंधाधुंध बिजली परियोजनाएं, लगातार घटते जंगल और बेतरतीब निर्माण आपदा से तबाही का बड़ा कारण हैं। आपदा से नुकसान को बढ़ाने में मानवीय गतिविधियों की बड़ी भूमिका है। राहत और बचाव के साथ आपदा के जोखिम को भी कम करने की जरूरत है।
शनिवार को हिमाचल में विकास मॉडल और प्राकृतिक आपदाएं विषय पर आयोजित अमर उजाला संवाद में विशेषज्ञों ने आगाह किया कि अब नहीं संभले तो बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। पंचायत स्तर पर नो कंस्ट्रक्शन जोन चिह्नित करना जरूरी है। हिमाचल में पर्यावरण महफूज रहेगा, तभी पर्यटन विकास की संभावनाएं रहेंगी। अमर उजाला शिमला यूनिट के स्थापना दिवस (26 अगस्त) के उपलक्ष्य पर आयोजित इस संवाद में उन्होंने कहा कि आपदा के खतरे पर हिमाचल में कई अध्ययन हो चुके हैं, लेकिन इनकी रिपोर्ट पर कोई काम नहीं हो रहा है। बिडंबना है कि जिन्हें हिमाचल के धरातल का पता नहीं, उनकी रिपोर्ट पर परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। हिमालयन रीजन खतरे में है। दूर दृष्टि के साथ तय करना होगा विकास का रोडमैप।
पर्यटन, पर्यावरण और विद्युत दोहन आपस में जुड़े हैं। जल विद्युत दोहन बहुत हो गया। अब इसे रोकने की जरूरत है। स्वीडन की तर्ज पर 20 फीसदी जल विद्युत क्षमता का दोहन पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से रिजर्व रखना होगा। फोरलेन का काम बंद होना चाहिए। -आरएल जस्टा, हाइड्रो इंजीनियर
विकास परियोजनाओं के लिए ऐसी कंसल्टेंट एजेंसियां रिपोर्ट बना रही हैं, जिन्हें हिमाचल के धरातल का पता ही नहीं है। इनकी रिपोर्ट पर बाहरी कंपनियां अवैज्ञानिक तरीके से निर्माण कार्य कर रही हैं। आपदा में नुकसान का एक बड़ा कारण यह भी है। - डॉ. पवन कुमार अत्री, फैकल्टी, पर्यावरण विज्ञान विभाग (एचपीयू)
हिमाचल प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान में गैप है। अभी पूरा ध्यान राहत एवं बचाव पर केंद्रित रहा है। रिलीफ एंड रेस्क्यू के साथ आपदा के जोखिम को कम करने पर फोकस करने की जरूरत है। - केआर भारती, पूर्व आईएएस अधिकारी
प्रदेश के लिए आदर्श विकास मॉडल वह होगा, जो वैज्ञानिक आकलन के आधार पर निर्माण-निषिद्ध क्षेत्रों को चिह्नित करे। नीति निर्माण में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नेताओं और नौकरशाहों के बीच समन्वय होना चाहिए। - डॉ. ख्याल चंद, सहायक प्रोफेसर, आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, एमएस हिपा शिमला
डेवलपमेंट के कन्सेप्ट में इकोनोमिक्स को हावी कर दिया, बाकी पहलू नजरअंदाज कर दिए गए हैं। विकास दूरगामी प्रभावों को ध्यान में रख विजन के साथ होना चाहिए। भूगोल ज्ञान को स्कूलों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना जरूरी है। - डॉ. सीमा चौधरी, सहायक आचार्य, भूगोल विभाग (एचपीयू)
हम सिर्फ आज का सोच रहे हैं, अगली पीढ़ी का नहीं। जब से पहाड़ों को काट पन बिजली प्रोजेक्ट बनने शुरू हुए हैं, आपदा से नुकसान बढ़ गया है। इसे लेकर न तो ब्यूरोक्रेट्स गंभीर हैं न ही दूसरे नीति निर्माता। - बीडी शर्मा, पूर्व सूचना एवं जनसंपर्क निदेशक
ग्लोबल वार्मिंग और अनियमित बारिश के कारण जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। यदि जलवायु परिवर्तन उनकी अनुकूलन क्षमता से अधिक तेजी से होगा, तो इनके विलुप्त होने की आशंका बढ़ेगी।- सात्विक चौहान, युवा उद्यमी
कृषि हमारे अस्तित्व की नींव है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इसमें दरार पैदा कर रहा है। बढ़ते तापमान और वर्षा के बदलते पैटर्न से न केवल फसलों, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी संतुलन के लिए खतरा है। - डॉ. अंकुश कदशोली, युवा पर्यावरणविद्
एक ही नदी पर एक से अधिक जलविद्युत परियोजनाओं से प्राकृतिक संसाधनों, ग्रामीण समुदाय और कृषि एवं पशुपालन पर भारी दबाव डाला है। कई प्रोजेक्ट पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्रों में लग रहे हैं। - दीक्षा कुमारी, शोधकर्ता, पर्यावरण विज्ञान
प्रदेश को बचाने में न्यायपालिका और मीडिया बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। फोरलेन में सीधी कटिंग की जा रही है। हजार साल पुराने पेड़ काटे जा रहे हैं। प्रोजेक्टों से जितनी मिट्टी निकल रही, नदियों में जा रही है। -देवेन खन्ना, अधिवक्ता, हिमाचल हाईकोर्ट
विकास का मॉडल प्रकृति से छेड़छाड़ वाला नहीं होना चाहिए। प्रदेश में विकास अवैज्ञानिक तरीके से हो रहा है। सुरंगें बनाने के लिए डि्रलिंग के स्थान पर ब्लास्टिंग हो रही है। अवैज्ञानिक तरीके से निर्माण के कारण पूरे पहाड़ हिल रहे हैं। - राजपाल खजूरिया, भौतिक विज्ञानी
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.