{"_id":"664616bfc4fe0634ea0728b5","slug":"all-the-leaders-in-himachal-are-appealing-to-the-voters-to-vote-through-pahari-dialects-2024-05-16","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Elections 2024: पहाड़ी बोलियों के रास्ते वोटरों के दिलों में उतरने की कोशिश कर रहे नेता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Elections 2024: पहाड़ी बोलियों के रास्ते वोटरों के दिलों में उतरने की कोशिश कर रहे नेता
Fri, 17 May 2024 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Fri, 17 May 2024 05:00 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में हर नेता वोटरों के दिलों में उतरने की कोशिश कर रहा है, ताकि जीत की मंजिल तक पहुंचा जा सके। इसमें स्थानीय बोलियों का सहारा लिया जा रहा है। कोई चंबियाली में कोई मंडियाली तो कोई पंजाबी पर जोर दे रहा है।
विज्ञापन
डिजाइन फोटो।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंबा के डलहौजी में आनंद शर्मा चंबियाली में बोल रहे हैं, ‘अपना सांसद हुआं तो पूछी भी सकदे, भाजपा तां मोदिए दे ना पर लड़ादी चुनाव, चुनावे बाद मोदी तां लबणा ही नी।’ कंगना मंडियाली में वोट मांगते हुए कह रही हैं, ‘मैं तुसां री मठी, मिंजो यक बार मौका देवा, मैं मंडिया यी रैहणा, कने तुसांरी सेवा करनी’। शिमला में नामांकन के बाद विनोद सुल्तानपुरी बोले, ‘आऊं तारा छोटू-तारा बेटा, आऊं तारी खातर काम करने, सारे वादे पूरे करने आया।’
विज्ञापन
हिमाचल में मतदाताओं को रिझाने के लिए लोकसभा चुनावों के दौरान हिमाचली बोलियों का खूब इस्तेमाल हो रहा है। राजनीतिक दलों के प्रत्याशी पहाड़ी बोलियों के रास्ते वोटरों के दिल में उतरने की कोशिश कर रहे हैं। कांगड़ा संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी आनंद शर्मा शिमला में पले-बढ़े, दिल्ली में रहे और केंद्र की सियासत में इनका बोलबाला रहा, लेकिन चुनाव कांगड़ा से लड़ रहे हैं। इसलिए कांगड़ी बोलने का प्रयास कर रहे हैं। एक इंटरव्यू के दौरान आनंद शर्मा को कांगड़ी बोलते सुनकर प्रदेश के आम लोग ही नहीं, भाजपा के नेता भी हैरान हो गए।
विज्ञापन
बाॅलीवुड क्वीन कंगना रणौत का बचपन मंडी में ही बीता है, लेकिन कई साल से मुंबई में रही हैं। भाजपा के टिकट पर मंडी से चुनाव लड़ रही हैं, इसलिए इन दिनों भाषण देते समय फर्राटेदार मंडियाली बोल रही हैं। मंडियाली में कंगना के भाषणों की रील्स सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही हैं। विक्रमादित्य सिंह यूं तो पहाड़ी कम ही बोलते हैं, लेकिन इन दिनों अपने भाषणों में पहाड़ी बोली का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार माहाैल देखकर भी भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं। शिमला संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी विनोद सुल्तानपुरी ने तो सोमवार को नामांकन के बाद अपने भाषण की शुरुआत ही बघाटी बोली में की और लोगों से सीधे जुड़ने का प्रयास किया। सोलन में चुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं और बुजुर्गों से विनोद सुल्तानपुरी बघाटी में बात करते दिखाई दे रहे हैं। हमीरपुर से भाजपा प्रत्याशी अनुराग ठाकुर और कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल सिंह रायजादा भी भाषण देते हुए स्थानीय बोलियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। रायजादा और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री पंजाबी पर ज्यादातर जोर दे रहे हैं।
विज्ञापन
नेताओं को चुनावों में ही याद आती हैं स्थानीय बोलियां
नेताओं को चुनावों में ही बोलियां याद आती हैं, चुनाव के बाद सब भूल जाते हैं। हिमाचल के एक नेता इसके अपवाद हैं। हमीरपुर के सेरा के रहने वाले स्वर्गीय नारायण चंद पराशर को हिमाचली बोलियों से खासा लगाव था। वह तीन बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक चुने गए। वीरभद्र सरकार में शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने हिमाचली बोलियों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए थे।
लोक जाणदे, कुण लोग वोटां दे समय वोट लैणे वास्ते लोकल बोलियां बोलदे हन : परमार
हिमाचल प्रदेश च मतियां लोकल बोलियां हन, जेहड़ी जे आहां प्रयोग करदे, जद लोकां कने मिलदे। ए अहांदी स्वाभाविक दिनचर्या है। कुछ नेता इन चुनावी दिनां च बोलियां बोलदे। लोक जाणदे, कुण नेता वोटां दे समय वोट लैणे वास्ते लोकल बोलियां बोलदे हन- विपिन परमार, भाजपा के वरिष्ठ नेता
लोगौ साथी जुड़ने रे तई बोलो पहाड़ी बोली : नरेश
लोगो साथी जुड़ने रे तई आजकलो रे नेता आपणी पहाड़ी बोली दे बोलो। माओं विक्रमादित्य ओ या सुल्तानपुरी या आनंद शर्मा, इतनो ई नई बॉम्बे दो आयी कंगना भी आजकली मंडयाली दे लागी ओ जोपदी। ऐ आच्छे बात ओ, आपणी बोली रा प्रचार करना चेंई, इलेक्शनों बीचे ही नई आगे-पीछे भी आपणी बोली बोलणी चेंई- नरेश चौहान, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष
हिमाचल में ये बोली जाती हैं बोलियां
हिमाचल में मुख्य रूप से सिरमौरी, बघाटी, महासूवी, मंडयाली, बिलासपुरी, कांगड़ी, चंबयाली, पंगवाली, लाहौली और किन्नौरी बोलियां बोली जाती है। चुनावों के समय नेताओं के मुंह से सुनने को मिल रही हिमाचली बोलियां आमतौर पर आकाशवाणी के हिमाचल कार्यक्रमों, गिरिराज और हिमभारती पत्रिका में भी सुनने पढ़ने को मिलती है।
ढाटू और सदरी पहनकर भाई के लिए वोट मांग रहीं अपराजिता
मंडी लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह के लिए उनकी बड़ी बहन अपराजिता इन दिनों पहाड़ी ढाटू और पहाड़ी सदरी पहन कर प्रचार कर रही हैं। अपराजिता विशेष तौर पर भाई के चुनाव प्रचार के लिए पंजाब से रामपुर आई हैं। अपराजिता छोटे भाई के लिए रामपुर के गांव-गांव पहुंचकर वोट मांग रही हैं। अपराजिता कह रही हैं कि विक्रमादित्य सिंह आपके क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, यह इस क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। संकट के समय विक्रमादित्य ही आपके साथ थे और आगे भी रहेंगे।