स्कूल का ‘मोती’ बनने को देने होंगे पांच हजार, योजना में सरकार ने किया संशोधन
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स्कूल का ‘मोती’ बनने के लिए गौरवमयी कार्य करने वाले व्यक्तियों को अपनी जेब भी ढीली करनी होगी। सरकार ने अखंड शिक्षा ज्योति मेरे स्कूल से निकले मोती योजना में संशोधन करते हुए गौरव पट्ट पर नाम लिखवाने को पांच हजार रुपये वसूलने का फैसला लिया है। स्कूलों की आर्थिक मदद के लिए सरकार ने गौरव पट्ट पर नाम लिखवाने के नियमों में बदलाव किया है।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने योजना में हुए संशोधन को लेकर सभी स्कूल प्रिंसिपलों और शिक्षा उपनिदेशकों को निर्देश जारी कर दिए हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय के मुताबिक स्कूलों के गौरव पट्ट पर नाम लिखवाने के इच्छुक लोगों की अधिक संख्या को देखते हुए पांच हजार रुपये लेने का फैसला लिया गया है। इस राशि को संबंधित स्कूल पर ही खर्च किया जाएगा।
उच्च शिक्षा निदेशक ने बताया है कि गौरव पट्ट पर नाम लिखवाने के लिए स्थानीय स्कूल के प्रभारी से संपर्क करना होगा। अपनी उपलब्धियों के संदर्भ में जानकारी देनी होगी। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी आवेदनों पर चर्चा करने के लिए बाद गौरव पट्ट पर लिखे जाने वाले नामों को मंजूरी देगी। अगर किसी व्यक्ति के नाम को एसएमसी मंजूर नहीं करती है तो संबंधित व्यक्ति जिला उपनिदेशक और शिक्षा निदेशालय में संपर्क कर सकता है।
कॉलेजों में भी लगाए जाएंगे गौरव पट्ट
स्कूलों के साथ डिग्री कॉलेजों में भी अखंड शिक्षा ज्योति मेरे स्कूल से निकले मोती योजना को शुरू करने का फैसला लिया गया है। अब कॉलेजों में भी गौरव पट्ट लगाए जाएंगे। कॉलेजों में लगाए जाने वाले गौरव पट्टों पर भी नाम लिखवाने के लिए पांच हजार रुपये देने होंगे।
स्कूल-कॉलेजों पर ही खर्च होगी यह राशि
शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि गौरव पट्ट पर नाम लिखवाने की एवज में ली जाने वाली पांच हजार रुपये की राशि को संबंधित स्कूल-कॉलेजों में ही खर्च किया जाएगा। इस राशि से शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाई जाएगी। आवेदनों को नियंत्रित करने के लिए पांच हजार रुपये लेने का फैसला लिया गया है।