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कृषि विवि: मिट्टी और खड़ी फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाकर घटेगा लोगों में कुपोषण
Thu, 19 Oct 2023 01:05 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 19 Oct 2023 01:05 PM IST
सार
मानव शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए आनुवांशिक के बजाय कृषि विज्ञान दृष्टिकोण यानी एग्रोनोमिक तरीके से उगाई गई फसलें ज्यादा कारगर हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अब मिट्टी और खड़़ी फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाकर लोगों में कुपोषण दूर किया जाएगा। इससे आयरन, जिंक, आयोडीन और सेलेनियम जैसे खनिजों तथा विटामिन की कमी दूर होगी। इसके लिए कृषि विशेषज्ञों ने सेब, सब्जियों और अनाजों में अनुमोदित उर्वरकों या छिड़काव से सूक्ष्म पोषक तत्वों को मिलाने की सिफारिश की है। इसके लिए चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के विशेषज्ञों ने एक अध्ययन किया है।
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मानव शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए आनुवांशिक के बजाय कृषि विज्ञान दृष्टिकोण यानी एग्रोनोमिक तरीके से उगाई गई फसलें ही ज्यादा कारगर करार दी गई हैं। इस तकनीक को बायोफोर्टिफिकेशन कहा गया है। यह पोषक तत्वों से भरपूर विविधता विकसित करने में सहायक होगी। यह अध्ययन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों डॉ. अवनी, डॉ. सोनिया सूद, डॉ. देशराज चौधरी और डॉ. रणवीर सिंह राणा ने किया है।
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इसके अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी जिसे ‘छिपी हुई भूख’ के रूप में भी जाना जाता है, एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करती है, जो तब होती है, जब शरीर में आवश्यक विटामिन और खनिजों की कमी होती है। यह उचित वृद्धि, विकास और समग्र स्वास्थ्य के लिए कम मात्रा में आवश्यक होते हैं। मनुष्यों में आयरन, जिंक, आयोडीन और सेलेनियम की कमी दुनियाभर में भोजन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
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बायोफोर्टिफिकेशन एक स्थायी रणनीति है, जिसे प्रभावित समुदायों के लोगों की ओर से व्यापक रूप से उपभोग की जाने वाली मुख्य फसलों में आवश्यक विटामिन और खनिजों के स्तर को बढ़ाकर सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए विकसित किया गया है। बायोफोर्टिफिकेशन के लिए कई कृषि तकनीकें हैं, जिनमें विशिष्ट पोषक तत्वों के उच्च स्तर के लिए फसलों का चयनात्मक प्रजनन, फसलों की ओर से पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए उर्वरकों और अन्य इनपुट का उपयोग करके कृषि संबंधी दृष्टिकोण और ट्रांसजेनिक दृष्टिकोण शामिल हैं।
कृषि विज्ञान दृष्टिकोण एक अस्थायी लेकिन त्वरित समाधान प्रदान करता है, जबकि आनुवंशिक दृष्टिकोण यानी प्रजनन और ट्रांसजेनिक दीर्घकालिक समाधान है, लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर विविधता विकसित करने के लिए यह समय की जरूरत है।
इन फसलों में होते हैं ये पोषक तत्व
हरी फलियां : एन, पी, के, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एमजी व सूक्ष्म पोषक तत्व आयरन, जिंक व कॉपर
तिलहन सरसों : बोरोन
पत्तागोभी : सेलेनियम
ब्रोकोली : नाइट्रोजन और जिंक
खीरा : पोटेशियम सल्फेट
पालक : सूक्ष्म पोषक तत्व कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, लोहा, विटामिन सी
काली मिर्च : आयोडीन
टमाटर : सेलेनियम