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Shimla News: प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ा रुझान, सात साल में 24,645 नए किसान जुड़े
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खास खबर....
प्राकृतिक खेती में लागत हुई कम, समर्थन मूल्य से दामों की चिंता भी खत्म और बढ़ गई बचत
जिले में 3,615 हेक्टेयर भूमि पर हो रही प्राकृतिक खेती
अनिल पंवार
शिमला। जिले में प्राकृतिक खेती की ओर किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। जिले में वर्ष 2018-19 में महज 500 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे थे। वहीं वर्तमान में 25,145 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्राकृतिक उत्पादों पर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। इसके कारण किसानों को दामों की चिंता कम हो गई है।
कृषि विभाग के प्राकृतिक खेती मिशन विंग के अनुसार जिले में करीब 3,615 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं से भी गति मिल रही है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018-19 में शून्य लागत प्राकृतिक खेती के नाम से पहल शुरू की। वर्तमान में इसका नाम राजीव गांधी प्राकृतिक खेती योजना रखा गया है। प्राकृतिक खेती में किसानों की बढ़ती भागीदारी और प्राकृतिक खेती के प्रति बढ़ते रुझान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन शुरू किया। इसके तहत जिला शिमला में 50 क्लस्टर गठित किए गए हैं। इन क्लस्टरों में करीब 6,250 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है और लगभग 2,500 हेक्टेयर भूमि को इसके दायरे में लाया गया है। विभाग के अनुसार प्राकृतिक खेती में किसानों की लागत कम हुई है और बचत बढ़ गई है। इसके साथ ही बाजार में दामों की चिंता भी खत्म हो गई है। सरकारें फसलों के अच्छे दाम दे रही हैं। यही वजह है कि किसानों को रुझान लगातार प्राकृतिक खेती और बढ़ रहा है।
इनसेट
मक्का से लेकर अदरक तक का समर्थन मूल्य दे रही सरकार
प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदेश सरकार ने कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य भी निर्धारित किए हैं। प्रदेश सरकार मक्का 50 रुपये प्रति किलोग्राम, हल्दी 150 रुपये, अदरक 30 रुपये, जौ 80 रुपये और गेहूं का 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से समर्थन मूल्य तय किया गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसानों को फसल के बेचने पर दामों में गिरावट का खतरा कम हो गया है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। इसके कारण किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
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इनसेट
प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों का हो रहा डिजिटल सत्यापन
जिले में प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है। प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों की पहचान उनका सत्यापन किया जा रहा है। राजीव गांधी प्राकृतिक खेती योजना के तहत जिले के करीब 23,000 किसानों का ऑनलाइन पहचान प्रणाली (सेटारा) के माध्यम से सत्यापन किया गया है।
कोट
जिले में प्राकृतिक खेती ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। 25,145 किसान प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं। प्राकृतिक खेती किसानों को लाभकारी साबित हो रही है। प्राकृतिक खेती मिशन के तहत चालू वर्ष में 17 नए क्लस्टर बनाकर 2,250 अतिरिक्त किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। -डीसी कश्यप, परियोजना निदेशक आतमा परियोजना जिला शिमला
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प्राकृतिक खेती में लागत हुई कम, समर्थन मूल्य से दामों की चिंता भी खत्म और बढ़ गई बचत
जिले में 3,615 हेक्टेयर भूमि पर हो रही प्राकृतिक खेती
अनिल पंवार
शिमला। जिले में प्राकृतिक खेती की ओर किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। जिले में वर्ष 2018-19 में महज 500 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे थे। वहीं वर्तमान में 25,145 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्राकृतिक उत्पादों पर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। इसके कारण किसानों को दामों की चिंता कम हो गई है।
कृषि विभाग के प्राकृतिक खेती मिशन विंग के अनुसार जिले में करीब 3,615 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं से भी गति मिल रही है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018-19 में शून्य लागत प्राकृतिक खेती के नाम से पहल शुरू की। वर्तमान में इसका नाम राजीव गांधी प्राकृतिक खेती योजना रखा गया है। प्राकृतिक खेती में किसानों की बढ़ती भागीदारी और प्राकृतिक खेती के प्रति बढ़ते रुझान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन शुरू किया। इसके तहत जिला शिमला में 50 क्लस्टर गठित किए गए हैं। इन क्लस्टरों में करीब 6,250 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है और लगभग 2,500 हेक्टेयर भूमि को इसके दायरे में लाया गया है। विभाग के अनुसार प्राकृतिक खेती में किसानों की लागत कम हुई है और बचत बढ़ गई है। इसके साथ ही बाजार में दामों की चिंता भी खत्म हो गई है। सरकारें फसलों के अच्छे दाम दे रही हैं। यही वजह है कि किसानों को रुझान लगातार प्राकृतिक खेती और बढ़ रहा है।
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मक्का से लेकर अदरक तक का समर्थन मूल्य दे रही सरकार
प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदेश सरकार ने कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य भी निर्धारित किए हैं। प्रदेश सरकार मक्का 50 रुपये प्रति किलोग्राम, हल्दी 150 रुपये, अदरक 30 रुपये, जौ 80 रुपये और गेहूं का 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से समर्थन मूल्य तय किया गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसानों को फसल के बेचने पर दामों में गिरावट का खतरा कम हो गया है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। इसके कारण किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
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प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों का हो रहा डिजिटल सत्यापन
जिले में प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है। प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों की पहचान उनका सत्यापन किया जा रहा है। राजीव गांधी प्राकृतिक खेती योजना के तहत जिले के करीब 23,000 किसानों का ऑनलाइन पहचान प्रणाली (सेटारा) के माध्यम से सत्यापन किया गया है।
कोट
जिले में प्राकृतिक खेती ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। 25,145 किसान प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं। प्राकृतिक खेती किसानों को लाभकारी साबित हो रही है। प्राकृतिक खेती मिशन के तहत चालू वर्ष में 17 नए क्लस्टर बनाकर 2,250 अतिरिक्त किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। -डीसी कश्यप, परियोजना निदेशक आतमा परियोजना जिला शिमला