हिमाचल: दो दिन तक केवल बिस्कुट खाकर किया गुजारा, मौत से कई बार हुआ सामना, काबुल से लौटे नवीन ने सुनाई आपबीती
नवीन ने बताया कि जब वह किसी तरह एयरपोर्ट की तरफ चले तो उससे पहले एक गेट पर पहुंचे। यहां ब्रिटिश आर्मी थी। उस गेट के पास सभी के पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज चेक किए जा रहे थे। वहां करीब 30 से 40 हजार लोग थे और भगदड़ मची हुई थी।
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अफगानिस्तान के काबुल से सोमवार देर रात 12.55 बजे अपने घर सरकाघाट पहुंचे नवीन की आंखों में अब भी दहशत है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दिनों में कई बार मौत से सामना हुआ। अपने कैंप से लेकर एयरपोर्ट तक पहुंचना बहुत ही भयानक रहा। उन्होंने ऐसी दर्दनाक घटनाएं देखी हैं, जिसे याद करके रूह कांप जाती है। नवीन ने बताया कि जब वह किसी तरह एयरपोर्ट की तरफ चले तो उससे पहले एक गेट पर पहुंचे। यहां ब्रिटिश आर्मी थी। उस गेट के पास सभी के पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज चेक किए जा रहे थे। वहां करीब 30 से 40 हजार लोग थे और भगदड़ मची हुई थी।
भगदड़ में कई बच्चे, बुजुर्ग पांवों के नीचे आ रहे थे। फायरिंग भी हो रही थी। इसके बावजूद लोग एयरपोर्ट जाने के लिए आतुर थे। कई लोग अपने बच्चों को आर्मी के जवानों की तरफ फेंक रहे थे। ऐसे में हजारों लोग हमारी तरफ अचानक आ गए और हम घबरा गए। लेकिन तालिबानियों ने उस दौरान हमारी रक्षा की और हमें सुरक्षित स्थान पर बैठाया। इसके बाद उन्होंने ब्रिटिश आर्मी से संपर्क किया। हमें एक होटल में ठहराया, जहां पर हजारों लोग थे। लेकिन वहां पर भी वही हालात थे। दो दिनों तक बिस्कुट खाकर ही गुजारा किया। एयरपोर्ट तक पहुंचना मुश्किल था। करीब ढाई किलोमीटर के रास्ते में बहुत ही डरावना मंजर देखा। जैसे-तैसे एयरपोर्ट पहुंचे जिसके बाद सभी ने राहत की सांस ली।
अपने लोगों को निकालती रही अन्य देशों की आर्मी
नवीन ने भारत सरकार का आभार जताया मगर कुछ ऐसी बातें भी कहीं जिससे उनकी नाराजगी जाहिर हो रही थी। नवीन ने कहा कि अन्य देशों की आर्मी अपने लोगों को निकाल रही थी तो भारत की तरफ से ऐसा नहीं देखा गया। शायद भारत सरकार की कोई मजबूरी होगी। लेकिन जब एयरपोर्ट पर हम पहुंचे तो वहां ब्रिटिश आर्मी और यूएस आर्मी ने उनको यह कहकर रोका कि वह उनको यूं ही नहीं जाने देंगे क्योंकि अगर कुछ होता है तो वह भारत सरकार को क्या जवाब देंगे। नवीन ने कहा कि तब जाकर एहसास हुआ कि भारत सरकार ने उन्हें निकालने के लिए कुछ किया है।
नवीन ने अवाहदेवी में टेका माथा, बोला - कभी नहीं जाऊंगा अरब देश
नवीन मंगलवार सुबह सबसे पहले अवाहदेवी मंदिर पहुंचे और माथा टेका। उसके बाद वह घर पहुंचे और रिश्तेदारों के साथ समय बिताया। दोपहर का खाना खाने के बाद थोड़ी नींद ली और फिर सरकाघाट बाजार घूमने निकले। यहां भी वह अपने परिचितों से मिले। नवीन ने कहा कि अब वह कभी भी अरब देशों में नहीं जाएंगे। वह काबुल में डेनमार्क की एक कंपनी में सुरक्षा अधिकारी के पद पर तैनात थे।