हिमाचल के 27वें राज्यपाल बने डॉ. देवव्रत, संस्कृत में ली शपथ
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डॉ. देवव्रत आचार्य हिमाचल के 27वें राज्यपाल बन गए। उन्होंने बुधवार को तीन बजे राजभवन शिमला में शपथ ली। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने उन्हें शपथ दिलाई। खास बात यह है कि उन्होंने संस्कृत में शपथ ली।
सीजे ने ‘मैं’ शब्द बोलकर शपथ दिलाना शुरू की तो राज्यपाल ने इसे ‘अहम्’ शब्द से प्रारंभ कर संस्कृत में पूरा किया। शपथ से पहले राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद मुख्य सचिव पी. मित्रा ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से जारी डॉ. देवव्रत आचार्य की नियुक्ति का संदेश पढ़ा।
इस मौके पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल, विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल, मंत्री कौल सिंह ठाकुर, मुकेश अग्निहोत्री, अनिल शर्मा, प्रकाश चौधरी, लोकायुक्त लोकेश्वर सिंह पांटा सहित प्रदेश के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। हरियाणा के मंत्री अनिल विज, कर्णदेव कंबोज सहित चार अन्य विधायक भी शपथ समारोह में पहुंचे।
हिमाचल अब मेरी नई कर्मभूमि
राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य की पत्नी दर्शना देवी, बेटा गौरव, पुत्रवधू कविता, बेटी मनीषा, दामाद वीर, तीन बड़े भाई महेंद्र सिंह, सूबे सिंह, प्रेम सिंह और छोटे भाई रणधीर सिंह, चारों भाइयों की पत्नियां, बच्चे और अन्य संबंधियों के अलावा कुरुक्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राजभवन का सभागार लोगों से खचाखच भरा रहा।
राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य ने शपथ लेने के बाद कहा कि वे सदैव हिमाचल के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयासरत रहेंगे। कुरु क्षेत्र के बाद हिमाचल उनकी नई कर्मभूमि होगी। शिक्षण संस्थानों में छात्र राजनीति के सवाल पर राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य ने केवल यही कहा कि विद्यार्थियों को केवल पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देना चाहिए। परोक्ष रूप से उन्होंने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव से असहमति जताई।