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Shimla News: लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर सर्वे शुरू, अवसाद के कारण आएंगे सामने
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प्रदेश के पांच जिलों में करवाया जाएगा है सर्वेक्षण, आईजीएमसी का मनोचिकित्सा विभाग की निगरानी में चल रहा है कार्य
प्रशिक्षित टीम घर-घर जाकर जानेगी आपका मानसिक स्वास्थ्य
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सर्वे करवाकर तनाव, अवसाद और आत्महत्या के बढ़ते मामलों के कारणों का पता लगाया जाएगा। अभी पांच जिलों के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर यह सर्वेक्षण किया जा रहा है। बिलासपुर में सर्वे हो चुका है, इसके बाद शिमला, कुल्लू और ऊना में यह कार्य होगा।
आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभाग और सामुदायिक चिकित्सा विभाग की निगरानी में विशेष रूप से प्रशिक्षित टीमें घरों में दस्तक देकर आंकड़े जुटाएंगी और पता लगाएंगी कि लोगों का मानसिक स्वास्थ्य कैसा है। बिलासपुर में यह सर्वेक्षण पूरा कर लिया है, तीन दिसंबर से ऊना में रैंडम सैंपलिंग शुरू होगी। टीम के सदस्य जीपीएस और टैब की मदद से लोगों से तय किए सवाल पूछेगी तथा उनके जवाब सर्वेक्षण में दर्ज किए जाएंगे। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वे (एनएमएसएस-2) के इस सर्वेक्षण में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की टीम निगरानी कर इसे संचालित कर रही है।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) बंगलूरू के समन्वय में यह कार्य पूरा किया जा रहा है। इसमें 5,950 सैंपल लिए जाएंगे। इसमें 4250 व्यस्कों, 1700 किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को टीम जानने का कार्य करेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सर्वेक्षण का संचालन आईजीएमसी के मनोचिकित्सा और कम्यूनिटी मेडिसिन (सामुदायिक चिकित्सा विभाग) विभाग कर रहा है। इसमें मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. दिनेश दत्त शर्मा और कम्यूनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अनमोल गुप्ता भी प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर और डॉ. देवेश शर्मा (मनोचिकित्सा) और डॉ. विजय बरवाल (कम्युनिटी मेडिसिन) सदस्य के रूप में शामिल हैं।
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सर्वेक्षण के आधार पर तय होंगी नीतियां
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के इस सर्वेक्षण का मकसद प्रदेश के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य में आए बदलाव को जानना और इसे आधार बनाकर ही आने वाले समय में स्वास्थ्य को लेकर नीतियां निर्धारित की जाएंगी। देशभर में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति को समझने के लिए किए जा रहे इस दूसरे सर्वेक्षण को 2025 तक पूरा किया जाना है। इससे पूर्व केंद्रीय मंत्रालय 2015-16 में एनएमएचएस-एक के तहत सर्वे करवा चुका है।
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प्रशिक्षित टीम घर-घर जाकर जानेगी आपका मानसिक स्वास्थ्य
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सर्वे करवाकर तनाव, अवसाद और आत्महत्या के बढ़ते मामलों के कारणों का पता लगाया जाएगा। अभी पांच जिलों के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर यह सर्वेक्षण किया जा रहा है। बिलासपुर में सर्वे हो चुका है, इसके बाद शिमला, कुल्लू और ऊना में यह कार्य होगा।
आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभाग और सामुदायिक चिकित्सा विभाग की निगरानी में विशेष रूप से प्रशिक्षित टीमें घरों में दस्तक देकर आंकड़े जुटाएंगी और पता लगाएंगी कि लोगों का मानसिक स्वास्थ्य कैसा है। बिलासपुर में यह सर्वेक्षण पूरा कर लिया है, तीन दिसंबर से ऊना में रैंडम सैंपलिंग शुरू होगी। टीम के सदस्य जीपीएस और टैब की मदद से लोगों से तय किए सवाल पूछेगी तथा उनके जवाब सर्वेक्षण में दर्ज किए जाएंगे। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वे (एनएमएसएस-2) के इस सर्वेक्षण में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की टीम निगरानी कर इसे संचालित कर रही है।
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राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) बंगलूरू के समन्वय में यह कार्य पूरा किया जा रहा है। इसमें 5,950 सैंपल लिए जाएंगे। इसमें 4250 व्यस्कों, 1700 किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को टीम जानने का कार्य करेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सर्वेक्षण का संचालन आईजीएमसी के मनोचिकित्सा और कम्यूनिटी मेडिसिन (सामुदायिक चिकित्सा विभाग) विभाग कर रहा है। इसमें मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. दिनेश दत्त शर्मा और कम्यूनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अनमोल गुप्ता भी प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर और डॉ. देवेश शर्मा (मनोचिकित्सा) और डॉ. विजय बरवाल (कम्युनिटी मेडिसिन) सदस्य के रूप में शामिल हैं।
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सर्वेक्षण के आधार पर तय होंगी नीतियां
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के इस सर्वेक्षण का मकसद प्रदेश के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य में आए बदलाव को जानना और इसे आधार बनाकर ही आने वाले समय में स्वास्थ्य को लेकर नीतियां निर्धारित की जाएंगी। देशभर में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति को समझने के लिए किए जा रहे इस दूसरे सर्वेक्षण को 2025 तक पूरा किया जाना है। इससे पूर्व केंद्रीय मंत्रालय 2015-16 में एनएमएचएस-एक के तहत सर्वे करवा चुका है।